लाहौल के करपट गांव के शहीद तेंजिन छुलटिम के पिता किशन चंद ने कहा कि मैंने अपना चिराग खो दिया है। लेकिन देश के लिए शहीद होने वाले बेटे की देशभक्ति को मैं सलाम करता हूं। बचपन में नकली पिस्तौल से खेलने का शौक आज उसने पूरा कर लिया है। शहीद की मां तेंजिन आंगमो व दो बहनें लाडले के खो जाने पर फूट-फूट कर रो रही हैं। मां कभी आसमान तो कभी रास्ते की ओर देख रही हैं। गांव में परिवार को दिलासा देने वालों की आंखें भी नम हो रही हैं।
शहीद तेंजिन छुलटिम के चाचा रमेश ने कहा कि तेंजिन जून माह में घर आया था। 21 जून को उसने दोबारा ड्यूटी ज्वाइन की थी। तेंजिन अपने माता-पिता व बहनों से वादा कर गया था कि जल्द छुट्टी लेकर घर आएगा। स्थानीय पंचायत प्रधान प्रेमदासी ने कहा कि तेंजिन छुलटिम मिलनसार था और उसमें देशभक्ति की भावना बचपन से थी। लाहौल स्पीति के विधायक रवि ठाकुर, पूर्व मंत्री डॉ. रामलाल मार्कंडेय, पूर्व विधायक रघुवीर सिंह ठाकुर ने शहीद के परिजनों के प्रति संवेदनाएं प्रकट की हैं।
उल्लेखनीय है कि लाहौल का करपट गांव इन दिनों बाढ़ की वजह से मुसीबत में घिरा हुआ है। करपट नाले में आई बाढ़ से यहां का जनजीवन बुरी तरह से प्रभावित है। इसी बीच ग्रामीणों ने गांव के एक वीर सैनिक को खो दिया, जिससे मानो गांव पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा हो। शुक्रवार सुबह हेलीकॉप्टर से शहीद की पार्थिव देह उनके पैतृक गांव लाई जाएगी। इसके बाद सैन्य सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार होगा। शहादत की खबर के बाद गांव में मातम का माहौल है।
तेंजिन के पिता किशन चंद का कहना है कि उन्हें अपने बेटे की शहादत पर नाज है। चार साल पहले सेना में भर्ती होने पर तेंजिन ने अपनी बहनों से कहा था कि अब मेरा जीवन देश के लिए है। मुझे देश के लिए कुछ कर दिखाना है। 21 जून को छुट्टी काटकर जाते हुए तेंजिन ने अपनी बहनों से राखी पर घर आने का वायदा किया था।