मंडी मध्यस्थता योजना के तहत सेब की खरीद के लिए तय की किए गए समर्थन मूल्य से बागवानों में भारी असंतोष हैं। इस साल भी बीते साल भी बीते वर्ष के ही मूल्यों से प्रदेश सरकार बागवानों के सेब खरीदेगी वहीं सरकारी एजेंसियों के रेटों में इस साल इजाफा किया गया हैं। सरकार ने सरकारी एजेंसियों को तोहफे में 25 प्रतिशत हेंडलिंग चार्ज बड़ा दिये हैं। प्रदेश उद्यान विभाग
एमआईएस के तहत केंद्र स्थापित करने के लिए सरकारी एजेंसियों एचपीएमसी और हिमफैड को केंद्र आउटसोर्स करने के लिए देगा जिसके तहत पूरे प्रदेश में 279 एमआईएस केंद्र स्थापित किए जाएंगे। बीते साल के मुकाबले इस बार प्रदेश में सेब की फसल
आधे से भी कम है जिसके चलते बागवानों को उम्मीद थी कि एमआईएस के तहत उन्हें फसल के अच्छे रेट मिलेंगे लेकिन कीमतों में बीते वर्ष के मुकाबले इजाफा न होने से बागवानों का बड़ा झटका लगा हैं।
साढ़े छह रूपये प्रति किलो बिकेगा सेब
मंडी मध्यस्थता योजना के तहत इस साल सेब की कीमतों में किसी भी तरह का बदलाव नहीं किया गया है। बीते साल के मुताबिक इस साल भी साढ़े छह रूपये प्रति किलो के हिसाब से सरकार बागवानों से सेेब खरीदेगा। वहीं हेडलिंग चार्ज में बीते साल के मुताबिक 25 प्रतिशत की बढ़ोतरी कर 2.20 पैसों से बढ़ाकर 2.75 पैसे कर दिये गये हैं।
क्या है हैंडलिंग चार्ज
हर साल प्रदेश सरकार सेब बागवानों के लिए फल खरीद केंद्र खोलती हैं। इन केंद्रों में बागवान अपने बी ग्रेड के सेब सरकार को बेचते हैं जिसका मूल्य भी सरकार ही तय करती हैं। मंडी मध्यस्थता योजना के तहत इन केंद्रों को खोला जाता है जिसमें केंद्र
सरकार प्रदेश सरकार को पैसे अवंटित करती है। प्रदेश उद्यान विभाग एचपीएमसी और हिमफैड को बागवानों से सेब खरीद के लिए केंद्र आउटसोर्स करता हैं। जिसमें यह एजेंसियां बागवानों से सेब खरीद कर परवाणू भेजती हैं जिसका सरकार इन्हें हेंडलिंग चार्ज देती हैं।
साढ़े छह रूपये खरीदा जाएगा सेब- भंघालिया
प्रदेश उद्यान विभाग के निदेशक डी पी भंघालिया ने बताया कि एमआईएस योजना के तहत बागवानों से साढ़े छह रूपये प्रति किलो के हिसाब से सेब खरीदा जाएगा और हेडलिंग चार्ज 2.75 पैसे दिये जाएंगे।
कम से कम सेब की लागत तो दें सरकार - चौहान
फल सब्जी एवं फूल उत्पादक संघ के प्रदेशाध्यक्ष हरीश चौहान ने कहा की कम से कम सरकार सेब उगाने के लिए लगने वाली लागत मूल्यों के बराबर तो उत्पादकों को फलों की कीमत दें। उन्होंने कहा कि उद्यान विभाग के मुताबिक सेब उगाने की लागत मूल्य 9.45 रुपये प्रति किलो है और बागवानों के
आंकलन के हिसाब से सेब के उत्पादक की लागत कीमत 20 रुपये प्रति किलो हैं। चौहान ने बताया कि सरकार बागवानों को सेब के साढ़े छह प्रति किलो कीमत देकर प्रोत्साहन के बजाए हतोउत्साहित कर रही हैं। अध्यक्ष ने सरकार से मांग की है कि कम से कम सेब बागवानों को उनके सेब उत्पादन की लागत कीमत के हिसाब से सेब की खरीद करें।