छोटी काशी मंडी के अधिष्ठाता राजदेवता माधोराय की अगुवाई में शाही अंदाज में निकली जलेब के साथ महाशिवरात्रि महोत्सव का आगाज हुआ। शनिवार दोपहर बाद करीब पौने तीन बजे निकली जलेब में परंपरा अनुसार एक दर्जन देवी-देवता माधोराय की पालकी के साथ चले।
विज्ञापन
2 of 7
देव मिलन के भव्य समारोह के हजारों लोग गवाह बने। सैकड़ों पारंपरिक वाद्य यंत्रों की गूंज से छोटी काशी देव आस्था से सराबोर हो गई। पूजा-अर्चना के बाद मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने जलेब में शिरकत की। पड्डल मैदान में ध्वजारोहण कर सात दिवसीय महोत्सव का विधिवत शुभारंभ किया।
विज्ञापन
3 of 7
इस बार 22 साल बाद उत्तरशाल क्षेत्र के देव पराशर ऋषि भी मेले में शिरकत कर रहे हैं। महोत्सव में बुलाए गए जनपद के 216 देवी-देवता और सैकड़ों देवलु एक सप्ताह तक मंडी वासियों के मेहमान बनकर रहेंगे। दिन में देव कारज और शाम को बॉलीवुड, स्थानीय कलाकार सांस्कृतिक संध्याओं में मनोरंजन करेंगे।
4 of 7
थाईलैंड का सांस्कृतिक दल भी महोत्सव में अपनी प्रस्तुति देगा। मंडी शिवरात्रि महोत्सव की शुरुआत 15वीं शताब्दी में राजा सूरज सेन ने की थी। जलेब में सबसे आगे पुलिस के घुड़सवार, पुलिस और होमगार्ड बैंड और जवानों के अलावा स्कूल के बच्चे मार्चपास्ट करते हुए निकले। इसके बाद बालीचौकी क्षेत्र के देवता छानणू-छमाहूं के साथ देवलु वाद्य यंत्रों की धुनों पर नाचते गाते चल रहे थे।
विज्ञापन
5 of 7
पीछे देव घटोत्कच कोटलू और मार्कंडेय सराज, देवी अंबिका, सयाटी नाग, मगरू महादेव, लक्ष्मी नारायण, बिठ्ठू नारायण, बह्मदेव तुंगासी, महामाया, चुंजुवाला, देवी नाऊ की अंबिका के देव रथों ने जलेब में शिरकत की। फिर राजदेवता माधोराय की पालकी और पीछे-पीछे शुकदेव ऋषि शारटी और थट्टा, देव सरीहटू, झाथीवीर, गणपति, टूटीवीर आदि देवताओं के रथ निकले।
विज्ञापन
6 of 7
-कुल्लू के विधायक महेश्वर सिंह शिवरात्रि की शाही जलेब में देवलुओं संग खूब नाचे। उन्होंने देव बिट्ठू नारायण के रथ को भी उठाया।
-शाही अंदाज में निकली राज देवता माधोराय की जलेब को देखने एक बजे ही पहुंच गए थे हजारों लोग।
-देव समागम के इस अद्भुत नजारे को मोबाइल पर वीडियो रिकॉर्डिंग और सेल्फी खींचने के लिए लोगों में खासा उत्साह दिखा।
-जलेब में देव देवताओं के रथ और वाद्य यंत्रों की ध्वनि पर नाचते गाते देवलू मुख्य आकर्षण का केंद्र रहे।
-मुख्यमंत्री जलेब में इस बार ओपन जीप में सवार होकर शामिल हुए। गत वर्ष मुख्यमंत्री ने पैदल जलेब में शिरकत की थी।
-जलेब की परेड में घोड़े को नियंत्रित करने के लिए घुड़सवार को खासी मशक्कत करनी पड़ी। घोड़ा बार-बार विदक रहा था।