अभिभावकों ने बताया कि उन्होंने कई बार शिक्षा विभाग के अधिकारियों और स्थानीय नेताओं से बच्चों के भविष्य को लेकर गुहार लगाई, लेकिन कोई भी इस बात को गंभीरता से नहीं ले रहा है।
कुछ दिन पहले ग्रामीणों के बच्चों को स्कूल न भेजने पर करसोग प्रशासन व शिक्षा विभाग के अधिकारी को अवगत करवाया था।
उन्होंने कहा कि खिचड़ी, वर्दी, किताबों को मुफ्त देने से शिक्षा नहीं मिलेगी। इसके लिए स्कूलों में योग्य अध्यापक तैनात करने होंगे। उन्होंने विभाग व सरकार को चेताया कि जब तक रिक्त पदों को नहीं भरा गया इन स्कूलों का पूरी तरह से बहिष्कार किया जाएगा।
शिक्षकों को डेपुटेशन पर भेजना मजबूरी
बीईईओ करसोग केशव राम ने बताया कि सोमवार को कोई भी विद्यार्थी नांज और तुंदल स्कूल में शिक्षा ग्रहण करने नहीं आया, जबकि स्टाफ स्कूल में ही था।
इन स्कूलों के अध्यापकों को डेपुटेशन पर भेजना मजबूरी है, क्योंकि पुराने स्कूल में कोई भी अध्यापक नहीं है। रिक्त पदों का मामला उच्च अधिकारियों के संज्ञान में है। सोमवार को बच्चे स्कूल न आने की सूचना भी उच्च अधिकारियों को दे दी गई है।