पच्चीस साल से मंदली-लठियाणी पुल बनने का इंतजार कर रहे लोगों की आस अब टूटने लगी है। उन्हें अहसास होने लगा है कि राजनेता उनका इस्तेमाल केवल सियासत के लिए ही करते हैं। राजनीतिक दल हर बार इसे चुनावी मुद्दा जरूर बनाते हैं, लेकिन इसका काम फिर रंग-रोगन तक ही सिमट जाता है। विभाग हर बार पुल के सांकेतिक बोर्ड की पुताई कर चला लाता है।
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चुनावों के दौरान ही पुल का यह सियासी जिन्न बोतल से बाहर आता है और कुटलैहड़ क्षेत्र में भाजपा- कांग्रेस के लिए सबसे बड़ा चुनावी मुद्दा बन जाता है। जनता हर बार ठगी सी रह जाती है। ऊना और हमीरपुर को जोड़ने वाले मंदली-लठियाणी पुल का निर्माण पिछले 25 साल से लटका हुआ है। दो-दो बार इसके शिलान्यास हो चुके हैं, लेकिन हजारों लोगों से जुड़ी इस परियोजना को कोई भी सरकार जमीन पर नहीं ला सकी है।
चुनाव आते ही हर बार आश्वासनों का झुनझुना ही मिलता है, लेकिन चुनावी शोर खत्म होते ही फिर मामला ठंडे बस्ते में चला जाता है। इस महत्वाकांक्षी प्रस्तावित प्रोजेक्ट का सपना साल 1990 में तत्कालीन मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने देखा था। उन्होंने पुल के लिए 60 लाख रुपये का बजट स्वीकृत कर दिया था। भाजपा का आरोप है कि कांग्रेस ने इस पुल पर हमेशा सियासत ही की है। इसके लिए स्वीकृत बजट को भी दूसरी जगह खर्च कर दिया।
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उसके बाद भाजपा सरकार के कार्यकाल में पूर्व मुख्यमंत्री प्रो. प्रेम कुमार धूमल ने भी बाकायदा क्षेत्र का दौरा कर इस पुल के निर्माण की घोषणा की। केंद्र प्रायोजित इस प्रोजेक्ट का बाद में लगभग 60 करोड़ का बजट रखा गया। इसकी वर्तमान में 100 करोड़ से ऊपर अनुमानित लागत बताई जा रही है, लेकिन सब हवा-हवाई। क्षेत्र के हजारों लोगों की उम्मीद मंदली-लठियाणी पुल पर वास्तव में राजनीतिक श्रेय और सियासी द्वंद्व की बलि चढ़ गई है।
565 मीटर लंबे पुल से 25 पंचायतों को लाभ
कुटलैहड़ विधानसभा क्षेत्र की मंदली पंचायत में गोबिंदसागर झील के किनारे प्रस्तावित इस पुल की कुल लंबाई 565 मीटर, जबकि संपर्क मार्ग की कुल लंबाई तीन किलोमीटर होगी। इसके बनने से बीहड़ूू-मंदली से लठियाणी की दूरी लगभग 32 किलोमीटर कम होगी। मौजूदा दौर में क्षेत्र की दर्जनों पंचायतों के लोगों को लठियाणी या हमीरपुर जाने के लिए करीब 32 किलोमीटर का सफर तय कर वाया थानाकलां और बंगाणा जाना पड़ता है।
स्थानीय निवासी प्रीतम चंद, चन्नण सिंह, प्रेम सिंह, रचना देवी, उर्मिला देवी, भाल सिंह, रत्न सिंह, रोशन लाल, लक्ष्मी दास, राम किशन, प्रभु राम, ओंकार चंद शर्मा, रजनीश शर्मा, भगतराम, बांकू राम, नीरज शर्मा, गणेश, सुरेश सिंह, हरि सिंह, गगन, महेंद्र सिंह, रमेश चंद, देसराज, अशोक कुमार, प्रकाश चंद, निक्का राम, राजेश कुमार तथा शेर सिंह का कहना है कि कितनी बार वे कांग्रेस और भाजपा सरकार की तरफ से वायदे सुन चुके हैं। कई बार तो लोनिवि ने मंदली-लठियाणी पुल के निर्माण के बोर्ड भी लगवा दिए, लेकिन आश्चर्य की बात यह है कि पुल का निर्माण कार्य आज तक शुरू नहीं हो पाया।
डीपीआर के निर्देश, जारी होगा बजट: कंवर
कुटलैहड़ के भाजपा विधायक वीरेंद्र कंवर ने कहा कि ऊना से भोटा वाया बीहडू-लठियाणी जिसमें लठियाणी-मंदली पुल प्रस्तावित है, राष्ट्रीय उच्च मार्ग के लिए मंजूर हो चुका है। इसकी डीपीआर के निर्देश दे दिए हैं। पुल के निर्माण पर सौ करोड़ से ज्यादा खर्च होगा। प्रदेश सरकार जमीन का अधिग्रहण करती है तो इसके लिए बजट की कमी नहीं आने देंगे। आरोप लगाया कि कांग्रेस ने इस प्रोजेक्ट के नाम का इस्तेमाल केवल सियासत के लिए किया।
कुटलैहड़ ब्लॉक कांग्रेस के अध्यक्ष रविंद्र फौजी का कहना है कि यह कांग्रेस और मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह का महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट था। इसके प्रथम चरण के लिए सीएम ने बाकायदा बजट का प्रावधान भी रखा, लेकिन भाजपा ने प्रदेश में सत्ता में आते ही इसका भूमि अधिग्रहण रोक दिया। इस वजह से पुल का काम लटक गया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस सरकार इस प्रोजेेक्ट को पूरा करेगी।
क्या कहता है कि विभाग
लोक निर्माण विभाग के अधिशासी अभियंता आरएस कालिया का कहना है कि उक्त पुल की लंबाई लगभग 565 मीटर होगी, जबकि एप्रोच सहित इसका कुल संपर्क मार्ग तीन किलोमीटर का होगा। सरकार के निर्देश मिलने पर इसे नेशनल हाइवे अथॉरिटी को हस्तांतरित कर दिया गया है।