कोरोना संकटकाल में अनलॉक होते ही पुलिस ने मानव भारती विश्वविद्यालय में फर्जी डिग्री मामले की परतें दोबारा खोलनी शुरू कर दी हैं। इस सिलसिले में गिरफ्तार पूर्व उप रजिस्ट्रार कृष्ण कुमार से कई अहम सुराग मिलने की संभावना है। कृष्ण कुमार के तार मानव भारती से राजस्थान की माधव भारती युनिवर्सिटी तक जुड़े हैं। कृष्ण मानव भारती विवि में 2013 से 2015 के बीच उप रजिस्ट्रार रहे हैं और 2018 के बाद से वे माधव विश्वविद्यालय राजस्थान चले गए थे।
फर्जी डिग्री का मामला सामने आने के बाद सोलन पुलिस राजस्थान गई थी और वहां से कंप्यूटर तथा मानव भारती की डिग्री समेत कई अहम सुराग पुलिस के हाथ लगे थे। पुलिस ने इस मामले में मानव भारती की सहायक रजिस्ट्रार व दो अन्य कर्मचारियों को पहले ही गिरफ्तार कर लिया है। अब कृष्ण चंद की गिरफ्तारी के बाद मामले के राज खुलने की संभावनाएं बन गई हैं।
शुरुआती पूछताछ में कृष्ण कुमार ने खुलासा किया है कि मानव भारती की सहायक रजिस्ट्रार उनके कहने पर ही विश्वविद्यालय के रजिस्ट्रार पद को भी संभाल रही थीं और सभी जरूरी कार्य के लिए उन्होंने महिला को ही हस्ताक्षर के लिए अधिकृत कर दिया था। पुलिस के सामने अब रजिस्ट्रार पद भी एक चुनौती बन गया है। पुलिस मानव भारती विवि में अब उन प्रमाणों की जांच करेगी जिससे सही रजिस्ट्रार की पहचान हो सके। फिलहाल पूरे मामले में विश्वविद्यालय के मालिक राज कुमार राणा ने इस मामले में गिरफ्तारी से बचने के लिए हाईकोर्ट से जमानत ले रखी है। जिस पर 17 जून को सुनवाई होनी है।
पूर्व उप रजिस्ट्रार पांच दिन की रिमांड पर
मानव भारती के पूर्व उप रजिस्ट्रार कृष्ण कुमार को पुलिस ने शनिवार को सोलन कोर्ट में पेश किया। जहां से उसे पांच दिन की पुलिस रिमांड पर भेज दिया है। पुलिस कृष्ण कुमार को अब 17 जून को दोबारा से कोर्ट में पेश करेगी। तब तक आरोपी से फर्जी डिग्री मामले में पूछताछ की जाएगी। पुलिस अधीक्षक अभिषेक यादव ने कृष्ण कुमार को रिमांड मिलने की पुष्टि की है।