मानव भारती विश्वविद्यालय की ओर से जारी सही डिग्रियों को लौटाने का काम शुरू हो गया है। एसआईटी की जांच में यह डिग्रियां सही पाई गई हैं। पुलिस की ओर से फर्जी डिग्रियां जारी किए जाने का मामला उजागर होने के बाद कई अभ्यर्थियों ने अपनी डिग्रियों की सत्यता जानने के लिए कार्यालय में आवेदन किया था। बाकायदा पुलिस कार्यालय में अपनी डिग्रियां जमा कराई थीं। इनमें कई अभ्यर्थी ऐसे थे, जिन्होंने परीक्षा पास कर ली थी, लेकिन उन्हें डिग्रियां नहीं मिली थीं।
इसे देखते हुए कमेटी का गठन किया गया था। इसमें पुलिस, शिक्षा और विनियामक आयोग के सदस्य शामिल थे। जांच में सही पाई गई डिग्रियों को अभ्यर्थियों को देना शुरू कर दिया है। एसआईटी का मानना है कि अब तक 15 सौ डिग्रियों की सत्यता जांचीं गई है। विश्वविद्यालय पर फर्जी डिग्रियां बांटने का आरोप है। पुलिस की विशेष जांच टीम मामले की पड़ताल कर रही है। ऐसे में विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों को प्रमाणपत्र नहीं मिल पा रहे हैं।
गौर हो कि मानव भारती विश्वविद्यालय की 43,000 डिग्रियां पुलिस जांच में फर्जी पाई गई हैं। पुलिस एसआईटी के अनुसार मानव भारती विश्वविद्यालय ने विद्यार्थियों को दर्जनों ऐसे कोर्स भी करवा दिए हैं, जिनकी विश्वविद्यालय के पास मान्यता ही नहीं थी। फर्जी तरीके से करवाए गए इन कोर्सों की हजारों फर्जी डिग्रियां देशभर में बेचकर करोड़ों रुपये कमाए गए। मानव भारती विश्वविद्यालय की 4,600 डीएमसी का सत्यापन किया जाना है।
जल्द पेश होगी फाइनल चार्जशीट
मानव भारती फर्जी डिग्री मामले में विशेष जांच दल (एसआईटी) की ओर से फाइनल चार्जशीट तैयार की जा रही है। अभियोजन विभाग ने चार्जशीट में कुछ तथ्यों पर आपत्ति जताई थी। ऐसे में इस चार्जशीट को लौटाया गया था। अब फाइनल चार्जशीट तैयार की गई है।