हिमाचल की सियासत में कुछ विवाद ऐसे होते हैं, जो वक्त गुजरने के बाद भी लोगों की यादों में बने रहते हैं। मेजर विजय सिंह मनकोटिया और पूर्व मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह से जुड़ा चर्चित सीडी प्रकरण भी ऐसा ही एक मामला था। वर्ष 2007 में सामने आई एक ऑडियो सीडी ने प्रदेश की राजनीति में ऐसा माहौल बनाया कि लंबे समय तक इसके राजनीतिक और कानूनी असर की चर्चा होती रही।
मेजर मनकोटिया उस समय हिमाचल की राजनीति में सक्रिय और मुखर नेता थे। उन्होंने एक ऑडियो रिकॉर्डिंग सार्वजनिक की और इसे लेकर तत्कालीन मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह पर गंभीर सवाल खड़े किए। मनकोटिया के आरोपों के बाद मामला राजनीतिक बहस का बड़ा केंद्र बन गया।
सीडी सामने आते ही गरमा गई थी राजनीति
ऑडियो सीडी सामने आने के बाद कांग्रेस की राजनीति में भी हलचल बढ़ी। मनकोटिया और वीरभद्र सिंह के बीच पहले से चले आ रहे राजनीतिक मतभेदों के बीच इस घटनाक्रम ने दोनों नेताओं के टकराव को और सुर्खियों में ला दिया। मामले में रिकॉर्डिंग की प्रमाणिकता, आवाज और उसे तैयार करने से जुड़े सवाल भी उठे। विवाद बढ़ने के साथ मामला जांच एजेंसियों और फिर अदालत तक पहुंचा। इस तरह एक राजनीतिक आरोप धीरे-धीरे लंबी कानूनी प्रक्रिया का हिस्सा बन गया।
अदालत तक पहुंचा मामला
सीडी प्रकरण में बाद के वर्षों में जांच और न्यायिक कार्रवाई हुई। मामले में वीरभद्र सिंह और अन्य लोगों के खिलाफ कार्रवाई की प्रक्रिया आगे बढ़ी। अदालत में सुनवाई के दौरान रिकॉर्डिंग और उससे जुड़े साक्ष्यों को लेकर भी कई सवाल सामने आए। मेजर मनकोटिया की अदालत में हुई गवाही भी इस मामले का महत्वपूर्ण हिस्सा बनी। रिपोर्टों के अनुसार, उनसे रिकॉर्डिंग के स्रोत और उसमें सुनाई देने वाली आवाजों के बारे में सवाल किए गए थे। इससे मामला एक बार फिर चर्चा में आ गया।
मनकोटिया की राजनीति में बेबाक अंदाज
मेजर विजय सिंह मनकोटिया की पहचान सिर्फ शाहपुर के नेता के रूप में नहीं थी। वह अपनी सीधी और स्पष्ट राजनीतिक शैली के लिए भी जाने जाते थे। वह कई बार अपनी ही पार्टी के नेताओं और सरकार की नीतियों पर खुलकर सवाल उठाते रहे। वीरभद्र सिंह के साथ उनके राजनीतिक संबंधों में भी कई बार तल्खी देखने को मिली। दोनों के बीच मतभेद अलग-अलग मौकों पर सार्वजनिक रूप से सामने आए। हालांकि राजनीतिक परिस्थितियों के अनुसार रिश्तों में बदलाव भी आया, लेकिन दोनों नेताओं के बीच का राजनीतिक टकराव हिमाचल की सियासत का चर्चित अध्याय बन गया।
चार दशक का राजनीतिक सफर
मनकोटिया का राजनीतिक सफर लंबा रहा। वह शाहपुर विधानसभा क्षेत्र से कई बार विधायक चुने गए और हिमाचल सरकार में मंत्री की जिम्मेदारी भी संभाली। राजनीति में आने से पहले वह भारतीय सेना में अधिकारी रह चुके थे। सैनिक पृष्ठभूमि के कारण उनके व्यक्तित्व में अनुशासन और स्पष्टता दिखाई देती थी। राजनीति में भी उन्होंने इसी अंदाज को बनाए रखा। यही वजह रही कि समर्थकों के साथ-साथ राजनीतिक विरोधी भी उनके बेबाक व्यक्तित्व को नजरअंदाज नहीं कर पाते थे।
निधन के बाद फिर याद आया पुराना राजनीतिक अध्याय
मेजर विजय सिंह मनकोटिया के निधन के बाद उनके राजनीतिक जीवन से जुड़े पुराने घटनाक्रम फिर चर्चा में हैं। इनमें सीडी प्रकरण सबसे ज्यादा चर्चित मामलों में शामिल रहा। यह प्रकरण सिर्फ दो नेताओं के बीच राजनीतिक विवाद की कहानी नहीं था, बल्कि उस दौर की हिमाचल की राजनीति में सत्ता, विरोध और सार्वजनिक आरोप-प्रत्यारोप के बदलते स्वरूप की भी झलक देता है। वर्षों बाद भी मनकोटिया के राजनीतिक सफर की चर्चा होती है तो इस प्रकरण का जिक्र स्वाभाविक रूप से सामने आता है।