खंडपीठ ने राज्य सरकार को सख्त आदेश दिया
न्यायाधीश विवेक सिंह ठाकुर और न्यायाधीश रंजन शर्मा की खंडपीठ ने राज्य सरकार को सख्त आदेश दिया है कि याचिकाकर्ताओं को प्रधानाचार्य पद का प्रभार संभालने की वास्तविक तिथि से उच्च वेतनमान की गणना की जाए और सभी बकाया (एरियर) का भुगतान 30 नवंबर तक अनिवार्य रूप से कर दिया जाए। अदालत ने स्पष्ट किया कि हेडमास्टर और लेक्चरर दोनों ही प्रधानाचार्य पद के लिए फीडर कैडर हैं। जब एक कैडर को कार्यभार संभालने की तिथि से वित्तीय लाभ दिए गए हैं, तो दूसरे कैडर को इससे वंचित रखना संविधान के समानता के अधिकार का उल्लंघन है।
अदालत ने सरकार के प्लेसमेंट वाले तर्क को किया खारिज
अदालत ने राज्य सरकार के प्लेसमेंट वाले तर्क को खारिज करते हुए कहा कि प्लेसमेंट केवल समान श्रेणी या पद के बीच होता है। किसी निचले (फीडर) कैडर के कर्मचारी को उच्च पद का कार्य सौंपकर उसे केवल प्लेसमेंट बताना कानूनी रूप से भ्रामक है। अदालत ने फंडामेंटल रूल 49 का उल्लेख करते हुए कहा कि जब किसी सरकारी कर्मचारी से किसी उच्च पद का पूरा कार्यभार लिया जाता है, तो वह उस उच्च पद के वेतनमान का पूर्ण हकदार होता है। विभाग काम लेने के बाद उचित वेतन देने से मना नहीं कर सकता। अदालत ने 8 मई 2025 की उस विवादित अधिसूचना को रद्द कर दिया है, जिसने पिछली अवधि के वित्तीय लाभों पर रोक लगाई थी।
एलर्जली भवन के पास अवैध निर्माण मामले में हाईकोर्ट ने सरकार से मांगा जवाब
प्रदेश हाईकोर्ट ने छोटा शिमला के ऐतिहासिक एलर्जली भवन के पास अवैध निर्माण और नियमों के उल्लंघन पर सरकार से विस्तृत जवाब तलब किया है। न्यायाधीश संदीप शर्मा और न्यायाधीश बिपिन चंद्र नेगी की खंडपीठ ने न्यायमित्र की दलीलें सुनने के बाद राज्य सरकार को इस पूरे मामले पर 3 सप्ताह के भीतर विस्तृत जवाब अथवा शपथपत्र दाखिल करने का आदेश दिया है। इस मामले की अगली सुनवाई अब 5 नवंबर को होगी। अदालत ने कैप्टन अतुल शर्मा की शिकायत पर यह संज्ञान लिया है। अदालत को सूचित किया गया कि छोटा शिमला में स्थित ऐतिहासिक एलर्जली भवन में वर्तमान में हिमाचल प्रदेश का सचिवालय चलता है, उसके ठीक पास कंक्रीट का नया ढांचा खड़ा किया जा रहा है। यह नया निर्माण ऐतिहासिक इमारत को पूरी तरह से दबा रहा है और उसके कुछ हिस्सों को छू रहा है। सूचना के अधिकार से मिली जानकारी का हवाला देते हुए कहा कि इस निर्माण में अनिवार्य सेटबैक नियमों की धज्जियां उड़ाई गई हैं। इसके लिए 17 अगस्त को कोर्ट ने वरिष्ठ अधिवक्ता को न्यायमित्र नियुक्त किया। याचिका में एक स्वतंत्र उच्चस्तरीय कमेटी बनाकर जांच करने और दोषी अधिकारियों की जवाबदेही तय कर उन पर कार्रवाई करने की मांग की गई है।