मूसलाधार बारिश से धान, मक्की और सब्जी की फसलें खेतों में बिछ गई है। सेब सीजन की रफ्तार भी धीमी पड़ गई है। पिछले दो दिन से सेब तोड़ने का काम रुका हुआ है। जो सेब तोड़कर स्टोरों में रखा गया है, उसे ही मंडियों में भेजा जा रहा है। मैदानी इलाकों में बाढ़ की वजह से आढ़ती बाहरी राज्यों को सेब भेजने से कतरा रहे हैं।
सेब उत्पादक क्षेत्रों में अधिकांश सड़कें क्षतिग्रस्त होने से सेब से लदे ट्रक आगे नहीं बढ़ पा रहे हैं। भारी नुकसान से प्रदेश भर के किसानों और बागवानों की नींद उड़ी हुई है। उधर, राज्य सरकार ने सभी जिलों के कृषि अधिकारियों को नुकसान की विस्तृत रिपोर्ट तैयार कर भेजने के निर्देश दिए हैं।
राज्य कृषि निदेशक डॉ. देस राज शर्मा ने कहा कि मैदानी क्षेत्रों में किसानों के खेतों में पानी ठहर गया है और फसलें खेतों में बिछ गई हैं। मैदानी इलाकों में धान और मक्की को ज्यादा क्षति हुई है। किसान फसलों को बचाने के लिए खेतों से पानी की निकासी की व्यवस्था करें। उन्होंने कहा कि जिलों से कृषि फसलों के नुकसान की रिपोर्ट अतिशीघ्र देने के निर्देश दिए हैं।
उधर, हिमाचल प्रदेश सब्जी एवं फल उत्पादक संघ के अध्यक्ष हरीश चौहान कहते हैं कि सेब उत्पादक क्षेत्रों खासकर जिला शिमला के रोहड़ू, जुब्बल-कोटखाई, चौपाल सहित कई अन्य इलाकों में अधिकांश संपर्क सड़कें क्षतिग्रस्त हैं। बागवानों को पैकिंग सामग्री लाने और तोड़ा हुआ सेब मंडियों तक पहुंचाने में परेशानी उठानी पड़ रही है।