भगवान रघुनाथ के मुख्य छड़ीबरदार महेश्वर सिंह ने कहा कि मुख्यमंत्री का अभिमान देव समाज को नहीं बल्कि अपने आप को डूबो देगा। रविवार को भगवान रघुनाथ के देवालय में खीर भंडारे के दौरान पत्रकारों से बातचीत में महेश्वर ने कहा कि भगवान रघुनाथ का फैसला वीरभद्र सिंह नहीं बल्कि देवभूमि कुल्लू के सैकड़ों देवी-देवता करेंगे।
मंदिर मेरी निजी भूमि में बना है, ऐसे में कोई भी मुझे बेदखल नहीं कर सकता। मुख्यमंत्री ने अलग से भव्य मंदिर निर्माण की बात कही है, जो उनके अभिमान को दर्शाता है। महेश्वर सिंह ने कहा कि शायद उन्हें कुल्लू की देव संस्कृति व देव परंपरा का ज्ञान नहीं है। उन्होंने कहा कि भगवान रघुनाथ को मेरे पूर्वज राजा जगत सिंह ने एक विचित्र घटना के बाद यहां लाया था और अपना सारा राजपाठ
उनके चरणों में समर्पित किया था। महेश्वर सिंह ने कहा कि भगवान रघुनाथ जी को छीनने का यह तीसरा अवसर है। इससे पहले 1942 तथा 1972 में भी प्रयास हुए थे और डीवी लाल की कमीशन रिपोर्ट ने उनके हक में फैसला दिया था। उन्होंने कहा कि सोमवार को हाईकोर्ट का फैसला आ जाएगा।
छोटे भाई कर्ण सिंह को वसीयतनामा पढ़ने की नसीहत
अपने अनुज एवं मंत्री कर्ण सिंह को महेश्वर सिंह ने कहा कि वह हर कहीं बयान दे रहे हैं कि मंदिर में उनका भी हक है। उन्होंने कहा कि कर्ण सिंह के हकों को कभी नहीं छीना गया है। कर्ण सिंह को हक मांगने से पहले पिता जी के लिखे वसीयतनामा को पढ़ना चाहिए। वसीयतनामा से अधिक हक व अधिकार कर्ण सिंह को दिए जा रहे हैं।
प्रशासन ने लगाए होर्डिंग
रघुनाथ मंदिर अधिग्रहण के बाद अब जिला प्रशासन भी सक्रिय हो गया है। सुल्तानपुर के पास मंदिर की ओर जाने वाले रास्ते में प्रशासन ने श्री रघुनाथ मंदिर न्यास नाम से होर्डिंग भी लगा दिए हैं। मंदिर को जाने वाले रास्ते को दर्शाने के अलावा मंदिर आयुक्त एवं उपायुक्त कुल्लू तथा अध्यक्ष मंदिर कमेटी एवं उपमंडलाधिकारी नागरिक कुल्लू का नाम अंकित किया है।