दरअसल इस महत्वाकांक्षी परियोजना का खाका पूर्व कांग्रेस सरकार में तत्कालीन बागवानी मंत्री विद्या स्टोक्स की निगरानी में तैयार हुआ। बार-बार पूर्व मंत्री और उनके करीबी अधिकारियों ने इसकी डीपीआर बनाने में खासी मशक्कत करने का दावा भी किया।
तय हुआ कि बागवानों को इस परियोजना का लाभ क्लस्टर बनाकर दिया जाएगा। इसके लिए हजारों क्लस्टर बनाए गए। सूत्रों ने बताया कि पिछले दिनों शिमला आई विश्व बैंक की टीम को भी मंत्री महेंद्र सिंह ने दो टूक कहा है कि इस परियोजना पर बजट कई जरूरी बदलावों के बाद ही खर्च होगा।
पिछली सरकार के कार्यकाल में थोपी गई बातें लागू नहीं होंगी। जहां सिंचाई का प्रबंध नहीं है, वहां विदेशी पौधे बांटने या अन्य लाभ को कोई क्लस्टर नहीं बनाए जाएंगे। जो बनाए गए हैं, वे खत्म कर दिए जाएंगे। बगैर सिंचाई वाले इलाकों में पौधे रोपने पर पैसा ही बर्बाद होगा।
बागवानी मंत्री महेंद्र सिंह ठाकुर ने माना कि उन्होंने विश्व बैंक टीम को समझाया है कि राज्य सरकार यह स्कीम कैसे लागू करेगी। महेंद्र सिंह बोले - हमने कर्जा प्रदेश में बागवानी विस्तार के लिए लिया है।
इसे हम ही तय करेंगे कि खर्च कैसे करना है। जहां सेब के बगीचे नहीं हैं, वहां बगीचे लगने चाहिए। इसे वहां खर्च होना चाहिए। इसके लिए खाली जगह चिन्हित होनी चाहिए। योजना सात साल तक लागू होनी है। दो साल बीत गए।
कोई खास प्रोग्रेस नहीं। हम आगामी पांच साल में पूरा बजट सही जगह खर्चेंगेे। पिछले दो साल में जो क्षति हुई है, उसकी आगामी वर्षों में प्रतिपूर्ति करेंगे। ये सही है कि पिछली सरकार ने इस स्कीम को पांच जिलों पर ही फोकस किया। अब ये पूरे प्रदेश में लागू होगी।