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महेंद्र को पसंद नहीं बागवानी प्रोजेक्ट का ‘स्टोक्स मॉडल’

Sat, 21 Apr 2018 10:25 AM IST
सुरेश शांडिल्य, अमर उजाला, शिमला
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विश्व बैंक से वित्त पोषित 1134 करोड़ रुपये का बागवानी विकास प्रोजेक्ट सेब वाले और बगैर सेब वाले जिलों के विवाद में फंस गया है। इस प्रोजेक्ट की मौजूदा रूपरेखा पर खुद बागवानी मंत्री महेंद्र सिंह ने ही आपत्ति जताई है।

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दरअसल महेंद्र सिंह ठाकुर को इस बागवानी प्रोजेक्ट का ‘स्टोक्स मॉडल’ पसंद नहीं आया है। महेंद्र सिंह को यह आपत्ति है कि पूर्व कांग्रेस सरकार ने इस प्रोजेक्ट को केवल सेब बहुल पांच जिलों पर ही अधिक फोकस किया है, जबकि 

इतना बड़ा लोन पूरे हिमाचल में बागवानी विकास पर खर्च होना चाहिए। उन्होंने फैसला लिया है कि कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में हजारों बागवानों के वे क्लस्टर खारिज होंगे, जो बगैर सिंचाई वाले इलाकों में बनाए गए हैं।

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पूर्व बागवानी मंत्री विद्या स्टोक्स की निगरानी में तैयार हुआ प्रोजेक्ट

दरअसल इस महत्वाकांक्षी परियोजना का खाका पूर्व कांग्रेस सरकार में तत्कालीन बागवानी मंत्री विद्या स्टोक्स की निगरानी में तैयार हुआ। बार-बार पूर्व मंत्री और उनके करीबी अधिकारियों ने इसकी डीपीआर बनाने में खासी मशक्कत करने का दावा भी किया।

तय हुआ कि बागवानों को इस परियोजना का लाभ क्लस्टर बनाकर दिया जाएगा। इसके लिए हजारों क्लस्टर बनाए गए। सूत्रों ने बताया कि पिछले दिनों शिमला आई विश्व बैंक की टीम को भी मंत्री महेंद्र सिंह ने दो टूक कहा है कि इस परियोजना पर बजट कई जरूरी बदलावों के बाद ही खर्च होगा।

पिछली सरकार के कार्यकाल में थोपी गई बातें लागू नहीं होंगी। जहां सिंचाई का प्रबंध नहीं है, वहां विदेशी पौधे बांटने या अन्य लाभ को कोई क्लस्टर नहीं बनाए जाएंगे। जो बनाए गए हैं, वे खत्म कर दिए जाएंगे। बगैर सिंचाई वाले इलाकों में पौधे रोपने पर पैसा ही बर्बाद होगा।
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हमने कर्ज लिया है, हम तय करेंगे कैसे खर्च होगा : महेंद्र

बागवानी मंत्री महेंद्र सिंह ठाकुर ने माना कि उन्होंने विश्व बैंक टीम को समझाया है कि राज्य सरकार यह स्कीम कैसे लागू करेगी। महेंद्र सिंह बोले - हमने कर्जा प्रदेश में बागवानी विस्तार के लिए लिया है।

इसे हम ही तय करेंगे कि खर्च कैसे करना है। जहां सेब के बगीचे नहीं हैं, वहां बगीचे लगने चाहिए। इसे वहां खर्च होना चाहिए। इसके लिए खाली जगह चिन्हित होनी चाहिए। योजना सात साल तक लागू होनी है। दो साल बीत गए।

कोई खास प्रोग्रेस नहीं। हम आगामी पांच साल में पूरा बजट सही जगह खर्चेंगेे। पिछले दो साल में जो क्षति हुई है, उसकी आगामी वर्षों में प्रतिपूर्ति करेंगे। ये सही है कि पिछली सरकार ने इस स्कीम को पांच जिलों पर ही फोकस किया। अब ये पूरे प्रदेश में लागू होगी।  
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