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हिमाचल में मैगी की सप्लाई ठप, सरकार ने शुरू करवाई जांच

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मैगी की गुणवत्ता को लेकर देशभर में उबाल के बीच हिमाचल में मैगी की सप्लाई ठप हो गई है। हर जिले में छापे डाल कर मैगी के नमूने लेने का काम शुरू हो गया है। स्वास्थ्य मंत्री कौल सिंह ठाकुर ने महकमे को सभी जिलों से मैगी के सैंपल लेकर जांच के लिए कंडाघाट लैब भेजने को कहा है।
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सरकार से आदेश मिलते ही निदेशक हेल्थ सेफ्टी एंड रेगुलेशन ने बुधवार को सभी सीएमओ को इस बाबत निर्देश जारी कर दिए हैं। इसी बीच, राजधानी शिमला समेत पूरे प्रदेश में मैगी की मांग काफी कम हो गई है। दुकानदारों ने नया स्टाक लेने से इंकार कर दिया है। दुकानों पर अब केवल पुराना माल पड़ा है। सरकार ने कहा है कि नमूनों की जांच रिपोर्ट आने के बाद आगे फैसला लिया जएगा।

सरकार के आदेश पर बुधवार को प्रदेश भर में मैगी के सैंपल लिए गए। मनाली से तीन, कालाअंब से तीन, धर्मशाला से दो, सोलन में भी सैंपल लिए हैं। उधर, स्वास्थ्य विभाग की टीम टाहलीवाल स्थित नेस्ले प्लांट से भी सैंपल लेने की तैयारी में है।
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शिमला में कारोबार चौपट

वहीं, राजधानी शिमला इसकी मांग आधे से भी कम रह गई है। शिमला के मुख्य डिस्ट्रीब्यूटर ने कंपनी से मैगी लेना बंद कर दी है। दुकानों में पुराना स्टॉक है, लेकिन यह भी बिक नहीं रहा है। शिमला व्यापार मंडल के अध्यक्ष इंद्रजीत सिंह का कहना है कि बीते एक सप्ताह से मैगी का कारोबार बुरी तरह प्रभावित हुआ है। अचानक मांग कम होने से कारोबारियों ने मैगी मंगवाना बंद कर दी है। कुल्लू में मैगी की मांग 60 से 70 फीसदी कम हो गई है।

बिग बाजार ने काउंटरों से हटाया
फ्यूचर समूह ने भी अपने रिटेल आउटलेट से मैगी की बिक्री नहीं करने का निर्णय लिया है। समूह के बिग बाजार, ईजी डे, केबीज और नीलगिरीज के नाम से 243 शहरों में 570 आउटलेट हैं। किशोर बियानी की अगुवाई वाली कंपनी फ्यूचर रिटेल ने कहा कि ग्राहकों की भावना को समझते हुए कंपनी ने अपने काउंटरों से मैगी नूडल्स को हटा दिया है।

केंद्रीय खाद्य एवं उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय के एक अधिकारी ने बताया कि फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड अथॉरिटी आफ इंडिया (एफएसएसएआई) के अधिकारी देश भर से मैगी के सैंपल उठा रहे हैं। उन्हें प्रयोगशाला में जांच के लिए भेजा जा रहा है ताकि असलियत सामने आ सके। उनके मुताबिक जांच की रिपोर्ट शीघ्र ही आने वाली है।
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नेस्ले उद्योग में गिरा उत्पादन

उधर, ऊना के टाहलीवाल स्थित नेस्ले उद्योग में उत्पादन बुरी तरह प्रभावित हुआ है। यहां रोजाना करीब 25 से 30 हजार पेटी मैगी का उत्पादन होता था, जो घटकर 8 हजार पेटी तक पहुंच गया है। एक हफ्ते से नेस्ले प्लांट में मैगी प्रोडक्शन की चार में से 3 लेन बंद पड़ी हैं।

हालांकि, उद्योग प्रबंधन की ओर से इस बारे कोई कुछ बोलने को तैयार नहीं है, लेकिन सूत्रों की मानें तो विवाद के बाद टाहलीवाल नेस्ले प्लांट में लगभग 80 फीसदी तक उत्पादन गिर गया है। मांग कम होने के कारण हजारों टन मैगी सप्लाई प्लांट में रुक गई है।

टाहलीवाल नेस्ले प्लांट से उत्तर भारत को मैगी की सप्लाई होती है। उधर नेस्ले प्लांट टाहलीवाल के एचआर प्रबंधक एसएस रावत ने किसी तरह की टिप्पणी से इंकार किया। मैगी की गुणवत्ता को लेकर मचे बवाल के बाद टाहलीवाल स्थित नेस्ले प्लांट से इसकी आपूर्ति पर असर पड़ा है। जानकारी के मुताबिक पहले यहां से रोजाना करीब 35 ट्रक देश के विभिन्न हिस्सों के लिए निकलते थे। अब इनकी संख्या घटकर 4 से 5 रह गई है।

हिमाचल में भी विभाग को मैगी के सैंपल लेकर जांच करने के आदेश दिए हैं। सैंपल की जांच कंडाघाट लैब में करवाने को कहा गया है। जांच में सैंपल फेल पाए जाते हैं तो सरकार की ओर से कार्रवाई अमल में लाई जाएगी। - कौल सिंह ठाकुर, स्वास्थ्य मंत्री
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