फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

VIDEO: माता के दरबार में चढ़ा 18 क्विंटल मक्खन, मिटेंगे बड़े-बड़े रोग

विज्ञापन
विज्ञापन
आपने कभी सुना है कि किसी मंदिर में मिलने वाले प्रसाद को खाया नहीं जा सकता। हिमाचल प्रदेश के जिला कांगड़ा में एक ऐसा अकेला शक्तिपीठ है जहां माघ मास में आयोजित होने वाले पर्व के बाद मिलने वाले प्रसाद को आप खा नहीं सकते। मान्यता है कि शरीर के चरम रोगों और जोड़ों के दर्द में लेप करने के लिए यह प्रसाद रामबाण का काम करता है।
विज्ञापन


यह परंपरा देवीय काल से चली आ रही है और शक्तिपीठ मां बज्रेश्वरी के इतिहास से संबंधित है। कहते हैं कि जालंधर दैत्य को मारते समय माता के शरीर पर कई चोटें लगी थीं। इन्हीं घावों को भरने के लिए देवताओं ने माता के शरीर पर घृत (मक्खन) का लेप किया था।

101 किलो देसी घी को 101 बार धोया जाता है

उसी परंपरा के अनुसार 101 किलो देसी घी को 101 बार शीतल जल से धोकर इसका मक्खन तैयार कर इसे माता की पिंडी पर चढ़ाया जाता है। मकर संक्रांति पर घृत मंडल पर्व को लेकर यह श्रद्धालुओं की ही आस्था है कि हर बार माता की पिंडी पर घृत की ऊंचाई बढ़ती जा रही है।

इस बार मंदिर में 14 जनवरी से शुरू हुए घृत पर्व में माता की पिंडी पर करीब 18 क्विंटल मक्खन चढ़ाया गया है। मां की पिंडी को फल मेवों, फूलों और फलों से सजाया गया है। यह पर्व सात दिन चलता है। सातवें दिन यानी 20 जनवरी को माता की पिंडी के घृत उतारने की प्रक्रिया शुरू होगी। इसके बाद 21 जनवरी को घृत प्रसाद के तौर पर श्रद्धालुओं में बांटा जाएगा।

आदि काल से चल रही परंपरा : पुजारी

बज्रेश्वरी मंदिर के वरिष्ठ पुजारी पंडित राम प्रसाद शर्मा कहते हैं कि मंदिर में यह प्रथा आदि काल से चली आ रही है। घृत पर्व का प्रसाद चरम और जोड़ों के दर्द में सहायक होता है। मंदिर में 21 जनवरी को घृत प्रसाद के तौर पर श्रद्धालुओं में बांटा जाएगा। मंदिर के इतिहास पर छपी किताब में भी इस परंपरा का जिक्र है। घृत मंडल पर्व पर माता की पिंडी पर मक्खन चढ़ाने की प्रक्रिया काफी पहले शुरू हो जाती है। स्थानीय और बाहरी लोगों द्वारा मंदिर में दान स्वरूप देसी घी पहुंचाया जाता है।

मंदिर प्रशासन इस घी को 101 बार ठंडे पानी से धोकर मक्खन बनाने के लिए मंदिर के पुजारियों की एक कमेटी का गठन करता है। पुजारियों की यही कमेटी मक्खन की पिन्नियां बनाती है और चौदह जनवरी को देर शाम माता की पिंडी पर मक्खन चढ़ाने की प्रक्रिया शुरू हो जाती है जो सुबह तक जारी रहती है।
विज्ञापन

क्लिक कर देखें वीडियो

और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें