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Lok Sabha Elections: हमीरपुर से लगातार 8 बार से जीत रही भाजपा का विजय रथ रोकना सुक्खू और मुकेश के लिए चुनौती

Wed, 13 Mar 2024 11:03 AM IST
Krishan Singh कमलेश रतन भारद्वाज, संवाद न्यूज एजेंसी, हमीरपुर

सार

 हमीरपुर से लगातार आठ बार जीत रही भाजपा के तिलिस्म को तोड़ना कांग्रेस के लिए चुनौती है।

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सत्ता संग्राम 2024 हिमाचल - फोटो : अमर उजाजा
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विस्तार
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संसदीय सीट हमीरपुर से लगातार आठ बार जीत रही भाजपा के तिलिस्म को तोड़ना कांग्रेस के लिए चुनौती है। यहां प्रत्याशी नहीं, मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू, उपमुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री और कैबिनेट मंत्री राजेश धर्माणी के कंधों पर भाजपा का विजय रथ रोकने की जिम्मेदारी है। दूसरी ओर, यहां से अनुराग ठाकुर पिछले चार चुनाव लगातार जीते हैं। यह पूर्व सीएम प्रेम कुमार धूमल के अलावा भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा का गृह संसदीय क्षेत्र है। राजनीतिक धुरंधरों की भरमार के चलते एक बार फिर हमीरपुर संसदीय सीट हॉट मानी जा रही है। बेशक इस सीट पर कांग्रेस की जीत से दूरी ढाई दशक की हो गई है, लेकिन प्रदेश में अब सत्तासीन कांग्रेस सरकार के सीएम सुक्खू ने मुकाबले को रोचक बना दिया है।

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सुक्खू नादौन के रहने वाले हैं। नादौन से ही ताल्लुक रखने वाले कांग्रेसी नेता स्व. नारायण चंद पराशर तीन दफा सांसद रहे हैं। उनके बाद कांग्रेस टिकट पर ऊना जिले से मेजर जनरल विक्रम सिंह ने एक बार प्रेम कुमार धूमल को पराजित किया था। बीते 16 लोकसभा चुनावों में भाजपा को 10 बार और कांग्रेस को 5 बार जीत मिली है, जबकि एक दफा जनता पार्टी ने जीत हासिल की है। पूर्व मुख्यमंत्री प्रेम कुमार धूमल के परिवार का इस सीट पर वर्ष 2007 से कब्जा रहा है।

वर्ष 2007 में इस सीट पर धूमल विजयी हुए थे। इसके बाद से यह सीट धूमल के बेटे अनुराग ठाकुर के पास है। अनुराग इस सीट पर पहले ऐसे प्रत्याशी हैं, जिन्होंने जीत का चौका लगाया है। इस सीट से तीन बार जीत हासिल करने वाले सुरेश चंदेल को लोकसभा में एक विवाद के चलते वर्ष 2007 में सीट गंवानी पड़ी थी। उपचुनाव में प्रेम कुमार धूमल ने इस सीट से जीत हासिल की। लेकिन, उनके मुख्यमंत्री बनने से यहां दोबारा उपचुनाव हुआ और अनुराग ठाकुर विजयी हुए। इस जीत के बाद से लगातार अनुराग ठाकुर लोकसभा में हमीरपुर का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं। 
 

संसदीय क्षेत्रों में 65,902 वोटर
कांगड़ा     21,258
मंडी    13,024
हमीरपुर      23,346
शिमला     8,274
 

 ये 17 विस क्षेत्र आते हैं इस सीट में 
हमीरपुर संसदीय क्षेत्र पांच जिलों के विधानसभा क्षेत्रों को जोड़कर बना है। इसमें धर्मपुर, भोरंज, सुजानपुर, हमीरपुर, नादौन, बड़सर, बिलासपुर, घुमारवीं, झंडूता, श्री नयनादेवी, ऊना, गगरेट, चिंतपूर्णी, हरोली, कुटलैहड़, देहरा और जसवां-परागपुर विधानसभा क्षेत्र शामिल हैं।
 

अयोग्य घोषित कांग्रेस के 3 विधायक और दो निर्दलीय इसी संसदीय क्षेत्र से
संसदीय क्षेत्र के 17 विधानसभा क्षेत्रों में से 10 कांग्रेस के विधायक हैं, जबकि पांच पर भाजपा और दो पर निर्दलीय हैं। अयोग्य घोषित कांग्रेस के तीन विधायक इस संसदीय क्षेत्र से हैं। इनमें सुजानपुर से राजेंद्र राणा गगरेट से चैतन्य शर्मा और बड़सर से इंद्रदत्त लखनपाल शामिल हैं। देहरा से होशियार सिंह और हमीरपुर शहर से आशीष शर्मा निर्दलीय विधायक हैं जो इस समय कांग्रेस की मुश्किलें बढ़ाए हुए हैं।

कब कौन बना सांसद
वर्ष           नाम                      पार्टी
1967      प्रेम चंद वर्मा            कांग्रेस
1971    नारायण चंद पराशर    कांग्रेस
1977    ठाकुर रणजीत सिंह    जनता पार्टी
1980    नारायण चंद पराशर    कांग्रेस
1984    नारायण चंद पराशर    कांग्रेस
1989     प्रेम कुमार धूमल        भाजपा
1991    प्रेम कुमार धूमल        भाजपा
1996    जनरल विक्रम सिंह    कांग्रेस
1998    सुरेश चंदेल              भाजपा
1999    सुरेश चंदेल              भाजपा
2004    सुरेश चंदेल              भाजपा
2007    प्रेम कुमार धूमल       भाजपा
2008    अनुराग ठाकुर         भाजपा
2009    अनुराग ठाकुर         भाजपा
2014    अनुराग ठाकुर         भाजपा
2019    अनुराग ठाकुर         भाजपा

बीते पांच चुनावों में मिले वोट
वर्ष          भाजपा             कांग्रेस
2019         6,82,692     2,83,120
2014    4,48,035         3,49,632
2009    3,73,598         3,00,866
2008    3,74,339        1,99,637
2007    3,82,128       3,02,069
2004    3,13,243       3,11,628

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जातीय समीकरण : राजपूत बहुल क्षेत्र में ओबीसी से भी रहे सांसद
संसदीय क्षेत्र में 5.25 लाख राजपूत, 2.95 लाख ब्राह्मण, 3.44 लाख अनुसूचित जाति, 29 हजार अनुसूचित जनजाति और 2.15 लाख ओबीसी वोटर हैं। 17 विस क्षेत्रों में हमीरपुर जिला की भोरंज, बिलासपुर की झंडूता और ऊना की चिंतपूर्णी विधानसभा सीट कुल तीन विस क्षेत्र अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित हैं। यहां से एक बार ओबीसी से भी सांसद रहे हैं।
 

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