कांग्रेस के सामने अब धर्मशाला, सुजानपुर, बड़सर, गगरेट, कुटलैहड़ और लाहौल-स्पीति विधानसभा क्षेत्र में उपचुनाव के लिए प्रत्याशियों का चयन करना चुनौती बना गया है। बीते दिनों सियासी संकट से निकली कांग्रेस को इस बात का इल्म नहीं था कि उपचुनावों का भी इतनी जल्दी सामना करना पड़ेगा। सभी की नजरें 18 मार्च को सुप्रीम कोर्ट में होने वाली सुनवाई पर ही टिकी थीं। लेकिन निर्वाचन आयोग ने शनिवार को उपचुनाव की घोषणा कर दी।
लोकसभा चुनाव जीतने के लिए रणनीति बना रही कांग्रेस को अब बदली परिस्थिति में नये सिरे से योजना तैयार करने को मजबूर होना पड़ेगा। सुजानपुर से कांग्रेस के बागी राजेंद्र राणा तीन बार के विधायक हैं। 2012 में इन्होंने बतौर निर्दलीय चुनाव जीता था। 2017 और 2022 में कांग्रेस टिकट पर जीत दर्ज की। सुजानपुर विधानसभा क्षेत्र में कांग्रेस के दूसरी पंक्ति के नेताओं में कोई भी बड़ा नाम नहीं है। यहां कांग्रेस को हर गुणा-भाग पर ध्यान देते हुए उपचुनाव के लिए प्रत्याशी तय करना होगा।
धर्मशाला में सुधीर शर्मा के विकल्प के तौर पर देवेंद्र जग्गी, करण इंद्र सिंह, लाहौल-स्पीति में रवि ठाकुर के विकल्प के तौर पर फुंचुक राय, रघुवीर सिंह, गगरेट में चैतन्य शर्मा की जगह कुलदीप कुमार, कुटलैहड़ में विवेक शर्मा और बड़सर में मनजीत डोगरा, नरेश लखनपाल सरीखे नेताओं को अब कांग्रेस आगे ला सकती है। शिमला से अमित नंदा, सोहन लाल, दयाल प्यारी, कांगड़ा से आशा कुमारी, संजय चौहान, करण पठानिया, हमीरपुर से सतपाल रायजादा, धर्मेंद्र पटियाल और मंडी से प्रतिभा सिंह, कौल सिंह ठाकुर के नाम की चर्चा है। लोकसभा प्रत्याशियों को तय करने के लिए अगले सप्ताह मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू और प्रदेश अध्यक्ष प्रतिभा सिंह का दिल्ली जाना प्रस्तावित था लेकिन अब उपचुनाव भी साथ में होने से यह दौरा कुछ दिन टल सकता है।