कांगड़ा में बाली का जनता के बीच बड़ा कद है। लोकसभा चुनाव में बाली को साथ लिए बिना जीत संभव होती न देख काजल ने गुरु और चेले का सियासी तीर चलाकर नए सियासी रिश्ते गठना ही बेहतर समझा। नगरोटा और धर्मशाला में काजल ने बाली के पांव छूकर जीत का आशीर्वाद लेने की कोशिश की।
एक दूसरे के खिलाफ खुले मंच पर बयानबाजी करने वाले वीरभद्र सिंह और सुखविंद्र सुक्खू भी अचानक तारीफों के पुल बांधने लगे। शीत युद्ध के बीच राजेंद्र राणा और सुक्खू भी एकमंच पर आ गए। धुर विरोधी रहे सुखराम और वीरभद्र सिंह को भी लोकसभा चुनाव की मजबूरी ने गले मिला दिया।
कुछ माह पहले कांगड़ा एयरपोर्ट पर एक दूसरे पर जमकर भड़ास निकालने वाले भाजपा नेता किशन कपूर और सरवीण चौधरी अचानक एकजुट हो गए। कुछ दिन पहले शाहपुर के कार्यक्रम में सरवीण ने कपूर की जीत के लिए बड़ा महिला सम्मेलन करवा दिया। पिछले सवा साल से एक दूसरे के क्षेत्र में हस्तक्षेप के आरोपों के चलते दोनों के बीच आपसी कलह जगजाहिर थी।