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चुनावी मुद्दा: हिमाचल में उद्योगों को नहीं मिला बुनियादी ढांचा

Mon, 06 May 2019 11:51 AM IST
अरविन्द ठाकुर न्यूज डेस्क, अमर उजाला, शिमला
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सांकेतिक तस्वीर
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हिमाचल में उद्योगों के विस्तार के लिए बुनियादी ढांचा नहीं मिल पाया है। प्रदेश के पुराने औद्योगिक क्षेत्र अच्छी सड़कों से नहीं जुड़ पाए हैं। लिहाजा, उद्योगों के विस्तार में दिक्कतें पेश आ रही हैं।

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उद्योगों की जरूरत के अनुसार रेल विस्तार और फोरलेन सड़कों का काम पूरा नहीं हुआ है। ऐसे में प्रदेश में नए और बडे़ उद्योग कैसे स्थापित किए जा सकेंगे। उद्योगों की दर्जनों समस्याएं हैं और इनका निराकरण करे बिना औद्योगिक विकास की गति कैसे पकड़ी जाएगी। 

प्रदेश में चालीस हजार छोटे-बड़े उद्योग
प्रदेश भर के विभिन्न हिस्सों में करीब चालीस हजार उद्योग स्थापित हैं। इन उद्योगों में कुटीर, लघु, मध्यम और बड़े उद्योग शामिल हैं। ये उद्योग आज भी कई समस्याओं से जूझ रहे हैं। इनके समाधान की बात हर बार उठती रही है परंतु समाधान आज दिन तक नहीं हुआ।

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ट्रक यूनियनों पर नकेल नहीं

राज्य में उद्योगों के समक्ष सबसे बड़ी समस्या यह है कि तैयार माल की ढुलाई के लिए सस्ती दरों पर ट्रक नहीं मिल पाते। जो ट्रक कच्चा माल लेकर आते हैं, उनको उद्योगों से तैयार माल नहीं ले जाने दिया जाता। छोटे उद्योग अपने वाहनों से भी माल की ढुलाई नहीं कर पाते। यूनियनों से ट्रकों का भाड़ा 25 प्रतिशत ज्यादा लिया जाता है। इस कारण से माल ढुलाई में बाधा आती है। 

रेल विस्तार न होने से दिक्कतें
रेल विस्तार न होने से सबसे ज्यादा मार उद्योगों को पड़ी है। राज्य में रेल विस्तार समय पर कर दिया जाता तो उद्योगों को कच्चा माल और तैयार माल बाजार तक पहुंचाने में आर्थिक बोझ नहीं उठाना पड़ता। आज भी परिवहन के विकल्प के रूप में औद्योगिक क्षेत्रों को रेल मार्ग से नहीं जोड़ा जा सका है। 

बुनियादी सुविधाएं कमजोर 
प्रदेश के औद्योगिक क्षेत्रों में उद्योगों के लिए बुनियादी सुविधाएं कमजोर हैं। कॉमन फेसिलिटी सेंटर तो गिनती के हैं, परंतु इनमें पूरी सुविधाएं उपलब्ध नहीं हैं। इसके अलावा नए बड़े उद्योगों को कैसे आकर्षित करेंगे, क्योंकि इनके लिए बड़े लैंड बैंक औद्योगिक क्षेत्रों में उपलब्ध नहीं हैं। कोई उद्योग पांच सौ बीघा जमीन मांग ले तो उसे यह भूमि औद्योगिक क्षेत्रों में नहीं मिल पाएगी। 

सस्ती बिजली देने की मांग
हिमाचल प्रदेश में उद्योगों को सस्ती बिजली देने की मांग लंबे समय से की जा रही है। पड़ोसी राज्य उत्तराखंड, पंजाब और हरियाणा में सस्ती दरों में बिजली मिल रही है, जबकि हिमाचल में बिजली की दरें उद्योगों की खपत पर निर्भर करती है। 

देरी से मिलती है जमीन
प्रदेश में धारा 118 के तहत जमीन हासिल करने में काफी देरी होती है। जमीन लेने के लिए 118 की मंजूरी लेने में चार माह से दो साल तक का समय लग जाता है। जमीन देरी से मिलने के कारण उद्योग लगाने में विलंब होता है। 

प्रदेश में औद्योगिक क्षेत्रों में उद्योगों के विस्तार के लिए बुनियादी सुविधाएं नहीं हैं। माल ढुलाई, रेल और सड़कों का विस्तार नहीं हो पाया है। फोरलेन काम लटका है। उद्योगों को सुविधाएं देने के बाद बाद ही प्रदेश में औद्योगिक विकास संभव है।  
- नरेश चौहान, प्रदेश कांग्रेस के महासचिव

भाजपा ने औद्योगिकीकरण को बढ़ावा दिया है। विशेष औद्योगिक पैकेज भी भाजपा ने ही दिया था। कांग्रेस ने तो इसे उल्टा कम कर दिया। केंद्र में वीरभद्र और आनंद शर्मा महत्वपूर्ण मंत्रालयों में रहे। इनके समय में भी कोई खास काम नहीं हुए। 
- नरेंद्र अत्री, प्रदेश मीडिया सह प्रभारी, भाजपा
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