वोट डालने जाती महिलाएं
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ग्रामीण ओंकार सिंह, एन सिंह, सोनू, बंटी, मुकिंद्र, विनोद कुमार, बलदेव, दयालू, बबलू, मौजू और रूमाल सिंह ने बताया कि उन्हें केंद्र में बनने वाली नई सरकार से काफी उम्मीदे हैं। कहा कि आज तक किसी भी सरकार ने तडग़्रांव में रहने वाले 40 परिवारों के लिए रावी नदी पर पैदल पुल का निर्माण नहीं करवाया। इतना ही नहीं चुनाव के लिए वोट मांगने के लिए भी कोई प्रत्याशी उनके गांव नहीं पहुंचा।
चाहे वह लोकसभा के चुनाव हो या विधानसभा के चुनाव। सभी प्रत्याशी रावी नदी का तेज बहाव देख किनारे से ही लौट जाते हैं। जबकि गांववासी रोज जान को जोखिम में डालकर रावी नदी को घरूरू के जरिये पार करते हैं। रावी नदी को घरूरू से पार करना स्कूली बच्चों और महिलाओं के लिए काफी मुश्किल होता है। घरूरू से नीचे गिरने से गांव के दो लोग जान गंवा चुके हैं।
इसके अलावा एक दर्जन लोगों को गंभीर चोटिल हो चुके हैं। इतना ही नहीं घरूरू की गरारी में हाथ जाने से कई लोगों की उंगलियां भी कट चुकी हैं। गांववासी लंबे समय से सरकार और प्रशासन से यही मांग कर रहे हैं कि घरूरू के स्थान पर ग्रामीणों के लिए पैदल पुल का निर्माण किया जाए। लेकिन आज दिन तक उनकी यह मांग पूरी नहीं हो पाई है। इसको लेकर ग्रामीणों में भारी रोष है।
जिलेभर में लोकतंत्र के महापर्व में दिव्यांग और बुजुर्गों का जोश प्रेरणादायक था। सुबह से लेकर शाम तक पोलिंग बूथों पर बुजुर्गों और दिव्यांगों की लाइनें लगी रहीं। मतदान के लिए कई बुजुर्ग खुद पैदल चलकर नंगे पांव बूथों तक पहुंचे तो कई परिजनों की पीठों पर और निजी वाहनों में आए।
93 वर्षीय तवारु राम, 95 वर्षीय माघी देवी, 107 वर्षीय शाहड़ी देवी, 85 वर्षीय नारायण कौर, 103 वर्षीय ढहालू राम, 90 वर्षीय भद्रसिला, 92 वर्षीय लीला देवी ने कहा कि वोट डालना देश के हर नागरिक का परम कर्त्तव्य है। इसलिए हमें वोट डालना कभी नहीं भूलना चाहिए।
उधर, दिव्यांगों में 50 वर्षीय निर्मला देवी, 58 वर्षीय पारस शर्मा, 95 वर्षीय बादामु, 40 वर्षीय प्रवीन कुमार, 82 वर्षीय किशन चंद, 95 वर्षीय सनैहरु देवी, 107 वर्षीय ब्रिकी देवी, 42 वर्षीय खूब राम, 100 वर्षीय गलासो देवी, 105 वर्षीय वयोवृद्ध शिव राम, 32 वर्षीय तारा देवी, 95 वर्षीय देवकू देवी, 95 वर्षीय मैना देवी,
प्रभा देवी, 95 वर्षीय ज्यूणी देवी, 104 वर्षीय नराध देवी, 100 वर्षीय डोडी देवी, 95 वर्षीय मंघरी देवी आदि ने लाठियों और अन्य साधनों से पहुंचकर मतदान किया। निर्वाचन आयोग की ओर से सभी बुुजुर्गों और दिव्यांगों की मदद के लिए स्वयंसेवी भी बूथों पर तैनात किए गए थे।
जनजातीय क्षेत्र में चुनाव बहिष्कार की अफवाह के चलते एक बुजुर्ग दंपती ने मतदान में सबसे पहले जाकर अपने मताधिकार का प्रयोग किया। साथ ही चुनाव बहिष्कार जैसी अफवाहों पर भी करारा तमाचा लगाया।
पांगी घाटी के माहलियत पोलिंग बूथ में 121 वर्षीय वीर चंद निवासी हिमालयत ने अपनी 95 वर्षीय केसरी देवी के साथ जाकर मतदान किया। दंपती ज्यादा उम्र के कारण पैदल नहीं चल सकता था।
इसलिए परिजन उन्हें माहलियत से दो किमी दूर पोलिंग बूथ तक गाड़ी में बैठाकर ले गए। गाड़ी से उतरने के बाद परिजन के सहारे दंपती मतदान केंद्र पहुंचे। साथ ही अन्य लोगों को भी मतदान करने के लिए प्रेरित किया। वीर चंद जिले में सबसे ज्यादा उम्र वाले मतदाता होंगे।
दो दिन की बच्ची को लेकर जननी अस्पताल से अपने मतदान केंद्र पहुंचीं। महिला ने अपने परिवार के साथ मत का प्रयोग किया। बनकला पंचायत के प्रधान तपिंद्र शर्मा ने बताया कि दीपिका गुरुंग पत्नी सुमित गुरुंग का प्रसव दो दिन पहले ही अस्पताल में हुआ था।
नॉर्मल डिलीवरी के बाद दीपिका अस्पताल से डिस्चार्ज होकर अपने घर बनकला पहुंचीं। यहां राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला बनकला में अपनी बच्ची को साथ लेकर मत का प्रयोग किया। उनके साथ सास प्रोमिला व ससुर भूपेंद्र गुरंग भी पहुंचे। दीपिका ने बताया कि वे अपने मत का प्रयोग कर बहुत खुश हैं।
वहीं, कुल्लू में भी कई मतदाता सड़क सुविधा न होने के चलते नदी पार कर झूला पुल से वोट करने पहुंचे। मतदान के लिए पोलिंग बूथों पर दिनभर चहल पहल बनी रही। मतदान का सिलसिला देर शाम तक चलता रहा।
जिला के पोलिंग बूथों में मतदान के लिए सुबह सात बजे से पूर्व ही लोगों के आने का सिलसिला शुरू हो गया। उधर, जिला निर्वाचन अधिकारी यूनुस ने कहा कि लोगों ने सुबह से वोट करने को लेकर उत्साह दिखाया है। इस बार लोगों में मतदान को लेकर अधिक उत्साह रहा।