पवन काजल ने अमर उजाला से कहा कि अब हाईकमान ने उन्हें चुनाव लड़ने के लिए कहा तो वह जरूर लड़ेंगे। काजल के नाम पर भी सुधीर और बाली के बीच दिल्ली में शीत युद्ध गर्मी पैदा कर रहा है।
कपूर के खिलाफ काजल उतरे तो होगा जातीय मुकाबला
भाजपा से किशन कपूर के रूप में खेले गए जातीय कार्ड को टक्कर देने के लिए कांग्रेस ओबीसी कार्ड खेलने के लिए विचार कर रही है क्योंकि जिला कांगड़ा में ओबीसी वोट बैंक करीब 25 से 30 फीसदी है। वर्ष 2004 में भी कांग्रेस ने ओबीसी नेता चंद्र कुमार को मैदान में उतारकर शांता कुमार को पटकनी दी थी।
कांगड़ा जिले में 13 में से बैजनाथ, धर्मशाला, शाहपुर, पालमपुर विस क्षेत्रों में गद्दी वोट बैंक का ज्यादा प्रभाव है। चंबा जिले के चारों भटियात, चंबा, चुराह, डलहौजी विस क्षेत्रों में करीब 55 से 70 फीसदी वोट बैंक गद्दी समुदाय से है। शांता को पिछली बार भटियात से 25000 वोट की लीड मिली थी।
कांगड़ा जिले में नगरोटा बगवां, कांगड़ा, शाहपुर, ज्वालाजी, धर्मशाला, जवाली में ओबीसी वोट बैंक ज्यादा है। कांगड़ा जिले में ओबीसी वोट बैंक गद्दी वोट बैंक से ज्यादा है लेकिन चंबा में गद्दी समुदाय का वोट बैंक ज्यादा निर्णायक स्थिति में है। हालांकि, कांगड़ा जिले में पूर्व सैनिकों, राजपूत और ब्राह्मण वर्ग का वोट बैंक भी अच्छा खासा है।
बाली और सुधीर की नजर मिशन 2022 पर
उम्मीदवारी की रेस में आगे रहने के लिए शक्ति प्रदर्शन करने वाले सुधीर शर्मा के सामने पसोपेश वाली स्थिति है। दरअसल, विधानसभा के बाद लोकसभा में हार का रिस्क लेने से बेहतर वह धर्मशाला में उपचुनाव या मिशन 2022 को बेहतर विकल्प मान रहे हैं। उधर, बाली भी हाईकमान पर फैसला छोड़कर मिशन 2022 पर ध्यान दे रहे हैं।