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लोकसभा चुनाव 2019: चुनाव में पेंशन, और वेतन का भी होगा 'हिसाब'

Fri, 12 Apr 2019 01:04 PM IST
अरविन्द ठाकुर विपिन काला, अमर उजाला, शिमला
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विनोद कुमार, अराजपत्रित कर्मचारी महासंघ तदर्थ समिति के अध्यक्ष - फोटो : फाइल फोटो
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लोकसभा चुनाव में इस बार वेतन और पेंशन का मुद्दा भी हावी रहेगा। कांग्रेस और भाजपा के घोषणा पत्रों से कर्मचारी वर्ग गायब है। हिमाचल के करीब पौने दो लाख नियमित सरकारी कर्मचारी केंद्रीय वेतन आयोग की सिफारिशें लागू करने की मांग कर रहे हैं। इनके अलावा करीब अस्सी हजार सरकारी कर्मचारी पुरानी पेंशन स्कीम बहाल करने के लिए आंदोलनरत हैं। ये कर्मचारी राष्ट्रीय पेंशन योजना से जुड़े हुए हैं।

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प्रदेश के कर्मचारियों को अभी पंजाब की तर्ज पर वेतनमान दिया जा रहा है। वर्ष 2016 से प्रदेश के कर्मचारियों को केंद्रीय कर्मचारियों की तरह संशोधित वेतनमान नहीं दिया जा सका है। पंजाब सरकार जब अपने कर्मचारियों को संशोधित वेतनमान देगी तो ही हिमाचल के कर्मचारियों को भी संशोधित वेतनमान दिया जा सकेगा। हिमाचल प्रदेश कर्मचारी महासंघ एक साल से मांग कर रहा है कि अन्य राज्यों की तरह हिमाचल को भी केंद्रीय वेतनमान से जोड़ा जाए। 

उधर, प्रदेश के एनपीएस कर्मचारियों की मांग है कि वर्ष 2003 के बाद सरकारी नौकरी पर लगे कर्मचारियों को नई पेंशन योजना से कोई लाभ नहीं मिल रहा है। केंद्र सरकार की ओर से बार-बार दबाव बनाया जा रहा है कि पुरानी पेंशन योजना शुरू करके कर्मचारियों के भविष्य को सुरक्षित किया जाए। वर्तमान में नई योजना के तहत नाममात्र पेंशन दी जा रही है।
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पांच साल से नहीं हो पाई जेसीसी बैठक 
पूर्व की कांग्रेस सरकार पांच साल में सिर्फ एक संयुक्त सलाहकार समिति (जेसीसी) की बैठक बुला पाई। वर्तमान भाजपा की जयराम सरकार 14 माह में एक भी बैठक नहीं बुला सकी। पिछले पांच साल से बैठक न होने से कर्मचारियों की वेतन विसंगतियों के मामले नहीं सुलझ पाए हैं। लिहाजा, कर्मचारियों को कोर्ट का दरवाजा खटखटाना पड़ रहा है। यही नहीं, कर्मचारियों के भर्ती एवं पदोन्नति नियमों को बनाने और पदोन्नति के मसलों को सुलझाने के लिए जेसीसी की बैठक का इंतजार करना पड़ रहा है। 

निष्क्रिय है कर्मचारी कल्याण बोर्ड 
वर्ष 2009 में हिमाचल प्रदेश कर्मचारी कल्याण बोर्ड का गठन किया गया था ताकि कर्मचारियों के मसलों को सुलझाया जा सके। लेकिन यह बोर्ड महज कर्मचारियों की राजनीति के अखाड़े तक सीमित रहा। बोर्ड का गठन जिस मकसद के लिए किया गया था, वह सही मायने में पूरा नहीं हो सका। 

अनुबंध कर्मियों को दो साल में नियमित करने की मांग 
राज्य लोक सेवा आयोग और अधीनस्थ सेवा चयन आयोग से नियुक्त अनुबंध कर्मचारियों को दो साल की सेवा के बाद नियमित करने की मांग की जा रही है। अभी तीन साल की सेवा के बाद अनुबंध कर्मी नियमित किए जा रहे हैं। 

क्या कहते हैं कर्मचारी नेता
प्रदेश में पौने तीन लाख कर्मचारियों की उपेक्षा चुनावी घोषणा पत्रों में हुई है। कर्मचारियों को केंद्रीय वेतनमान से नहीं जोड़ा जा रहा, न ही जेसीसी की बैठकें हो रही हैं। कर्मचारी कल्याण बोर्ड अपनी भूमिका नहीं निभा पाया। अनुबंध कर्मचारियों को दो साल बाद नियमित किया जाना चाहिए। - विनोद कुमार, अराजपत्रित कर्मचारी महासंघ तदर्थ समिति के अध्यक्ष 

नई पेंशन योजना से कर्मचारियों का अहित हुआ है। नाममात्र की पेंशन कर्मचारियों को मिल रही है। सरकार से बार-बार मांग की जा रही है कि पुरानी पेंशन योजना लागू की जाए।  - खुशहाल, एनपीएस कर्मचारी संघ के प्रदेश प्रवक्ता

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