लॉकडाउन के चलते राज्य के भीतर व बाहर अटके हुए प्रदेश वासियों को लाने के लिए विशेष प्रबंध किए जाने के आग्रह को लेकर दायर याचिका को प्रदेश हाईकोर्ट ने खारिज कर दिया। न्यायालय ने पाया कि याचिकाकर्ता ने अपनी याचिका में जो आरोप लगाए है उन्हें वह दस्तावेजों सहित साबित करने में विफल रहा है। वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से मुख्य न्यायाधीश लिंगप्पा नारायण स्वामी और न्यायमूर्ति ज्योत्सना रिवाल दुआ की खंडपीठ ने मामले पर सुनवाई की। कोर्ट ने गुणवत्ताहीन होने पर याचिका को खारिज कर दिया।
विनय शर्मा की ओर से दायर याचिका की सुनवाई के दौरान कोर्ट ने ये आदेश पारित किए। वरिष्ठ अतिरिक्त महाधिवक्ता ने दलील दी कि राज्य सरकार द्वारा राज्य के भीतर व बाहर अटके हुए प्रदेश वासियों को लाने के लिए पहले ही आवश्यक कदम उठा लिए हैं। इसके अलावा अपेक्षित कदम भी उठाए जा रहे हैं। बता दें, याचिका में आरोप लगाया था कि राज्य के दो सांसद और पुलिस अधीक्षक किन्नौर के बच्चों को लॉकडाउन के दौरान राज्य में वापस आने के लिए राज्य सरकार ने इंतजाम किया लेकिन राज्य के उन्हीं की तरह फंसे अन्य निवासियों को आने के लिए राज्य सरकार अनुमति नहीं दे रही है जो कि राज्य सरकार की पिक एंड चूज की नीति को दर्शाता है।