कंपनी को 6 अक्तूबर 2017 को आशय पत्र दिया गया, मगर आचार संहिता लगने के कारण समझौता नहीं हो पाया। जो अभी सरकार के विचाराधीन है। हालांकि, कंपनी ने अस्पतालों में काम करना शुरू कर दिया है। तय हुआ है कि वेंटिलेटर, ऑक्सीजन उपकरणों समेत तमाम तरह के यंत्रों को इस कंपनी को सूचना मिलने के 24 घंटे के भीतर ठीक करना होगा।
एक्सरे, एमआरआई, अल्ट्रासाउंड से लेकर कोल्ड चेन आदि तमाम बाकी उपकरणों को एक सप्ताह के भीतर ठीक करना होगा। समय पर उपकरण ठीक न हुए तो कंपनी को इनके स्थान पर अपने उपकरण लगाने होंगे। ये सरकारी उपकरणों की मरम्मत के बाद हटाए जा सकेंगे। अगर कंपनी उपकरण तय समय में ठीक नहीं कर पाई तो 300 से 3000 रुपये प्रतिदिन के हिसाब से इसे पेनल्टी देनी होगी।
यह कार्यक्रम देश के 17 राज्यों में शुरू हो चुका है। हमने भी इस कार्यक्रम में मिले धन से न्यूनतम रेट वाली कंपनी यह काम दिया है। समझौते से पहले कंपनी को आशय पत्र दे दिया गया है। खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस कार्यक्रम को लागू करने मेें खासी दिलचस्पी दिखा रहे हैं। इससे आने वाले समय में अस्पतालों में उपकरणों के खराब होने की समस्या नहीं होगी। - डा. रमेश चंद्र, राज्य कार्यक्रम अधिकारी, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग