हिमाचल के शिमला जिले के रोहड़ू के नारड़ू गांव में तेंदुआ एक घर के कमरे में सोलह घंटे बंद रहा। रात करीब दो बजे तेंदुआ कुत्ते के पीछे भाग रहा था। इसी दौरान घर के कमरे में घुस गया। इसी दौरान परिवार की एक महिला ने हिम्मत दिखाकर कमरे के दरवाजे को बाहर से कुंडा लगा दिया।
इससे तेंदुआ कमरे में कैद हो गया। वीरवार शाम को वन्य प्राणी विंग की सात सदस्यीय टीम ने कड़ी मशक्कत के बाद तेंदुए को पकड़ने में सफलता हासिल कर ली। इसी के साथ नारडू गांव में करीब सोलह घंटों के बाद दहशत का माहौल खत्म हुआ। इलाके के लोगों ने भी राहत की सांस ली है।
नारडू में देर रात करीब दो बजे तेंदुआ कुत्ते को पकड़ने के लिए दौड़ रहा था। इसी बीच तेंदुआ गांव में एक घर के समीप पहुंच गया। घर की ऊपरी मंजिल में 65 वर्षीय बिरमा देवी और उसका बेटा संजु सो रहे थे। कुत्ते की आवाज सुनकर संजु कमरे से बाहर आया और तेंदुए को देखकर शोर मचाया। शोर सुनकर तेंदुआ घर की निचली मंजिल में स्थित कमरे में घुस गया।
बिरमा देवी ने दिखाई हिम्मत
तेंदुए के कमरे में घुसने के बाद बिरमा देवी ने हिम्मत दिखाई और निचली मंजिल में आकर कमरे के दरवाजे को बंद किया। इसकी सूचना वन विभाग को दी गई। सूचना मिलने के बाद वीरवार सुबह शिमला से वन्य प्राणी विंग की टीम रोहडू के लिए रवाना हुई। करीब तीन बजे टीम ने मौके पर पहुंचकर तेंदुए को पकड़ने के प्रयास आरंभ किए।
तीन घंटे की मशक्कत के बाद करीब छह बजे तेंदुए को पकड़ा गया। तेंदुए को लेकर टीम वापस शिमला लौट गई है। वन मंडल अधिकारी एके वर्मा ने बताया कि सूचना मिलने के बाद ही शिमला से टीम को बुलाया गया था। तेंदुए को पकड़ लिया गया है। वन्य प्राणी विंग की टीम तेंदुए को लेकर शिमला रवाना हो गई है।
बेड बॉक्स के पीछे छिपा था तेंदुआ
सबसे पहले कमरे की दीवारों में ड्रिलिंग मशीन से छेद बनाए गए, जिससे बेहोशी के इंजेक्शन को इंजेक्ट करने वाली गन की नली सुराख में डाली जा सके। तेंदुआ कमरे के अंदर बेड बॉक्स के पीछे छुपा हुआ था। काफी देर तक तेंदुए की हरकत न होने पर टीम ने उसे बाहर से ही छेड़ना शुरू किया।
तेंदुए को बेड बॉक्स के पीछे से हटाने के कई प्रयास किए गए। इसी बीच वन्य प्राणी विंग का शूटर ट्रेंकुलाइजर गन को लेकर तैयार बैठा था। शूटर तेंदुए के हरकत में आने का इंतजार कर रहा था। करीब दो घंटे तक टीम के सदस्यों ने तेंदुए को हरकत में लाने के कई प्रयास किए।
जैसे ही तेंदुआ बेड बॉक्स के पीछे से निकलकर बाहर आया, तभी शूटर ने तेंदुए को ट्रेंकुलाइजर गन से इंजेक्शन इंजेक्ट कर दिया। कुछ मिनट बाद तेंदुआ बेहोश हो गया। इसके बाद टीम के सदस्य कमरे में घुसे तथा बेहोश तेंदुए को पकड़कर पिंजरे में डाला। देर शाम टीम तेंदुए को लेकर शिमला रवाना हो गई।