इसी महीने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के हाथों प्रस्तावित कोल बांध परियोजना के उद्घाटन पर बादल मंडरा रहे हैं। यहां कोल बांध में बनी दो गैलरियों में पानी का भारी रिसाव हो रहा है। रिसाव इतना है कि नाले की तरह पानी आ रहा है।
परियोजना से जुड़े सूत्रों की मानें तो अगर हर दो घंटे में गैलरी से पानी न निकाला जाए तो उससे डैम को खतरा हो जाएगा। लिहाजा, परियोजना प्रबंधन ने गैलरी से पानी निकालने के लिए मोटरें लगा रखी हैं। परियोजना की वजह से विस्थापित लोगों ने भी साफ कर दिया है कि वे 15 अक्तूबर से पहले दिल्ली जाकर इस मामले के पूरे साक्ष्य और रिसाव की सीडी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को सौंपेंगे।
वहीं, अभी तक रोजगार के नाम पर हुए सभी समझौतों की कॉपी भी प्रधानमंत्री को सौंपी जाएगी, जिस पर एक बार भी अमल नहीं हुआ है। परियोजना के लोक संपर्क अधिकारी प्रवीण भारती का कहना है कि जो रिसाव हो रहा है, वह डिजाइन का हिस्सा है।
यह पहाड़ से निकलने वाला पानी है। उन्होंने साफ किया कि गैलरी में कोई रिसाव नहीं है। बता दें कि पानी का रिसाव होने का सबसे बड़ा कारण बांध निर्माण के दौरान कुछ खामियां हैं। पानी के रिसाव को रोकने के लिए लंबे समय तक काम भी किया गया, लेकिन सफलता नहीं मिल पाई।
मंत्री ने दिए एफआईआर कराने के निर्देश
कोल बांध परियोजना में विभाग ने 80 लाख का मछली बीज डाला है लेकिन परियोजना की लापरवाही से सारी मछलियां टरबाइनों के माध्यम से बाहर निकलकर मर गई हैं। 80 लाख का बीज डालने के बावजूद मात्र एक क्विंटल मछलियां हुई हैं। गत रोज घाघस में आए मत्स्य मंत्री ने विभाग को परियोजना के खिलाफ एफआईआर दर्ज करवाने को कहा है।
पीएम से पूछेंगे, उद्घाटन को कैसे हो गए तैयार
विस्थापित यूनियन प्रधान अनूप कुमार व प्रवक्ता पंकज ठाकुर ने बताया कि परियोजना की गैलरी में पानी का भारी रिसाव हो रहा है जिससे बांध को खतरा बना हुआ है। इसकी वीडियो और फोटो उनके पास मौजूद हैं। इन्हें वे प्रधानमंत्री के समक्ष रखेंगे। प्रधानमंत्री से मिलकर उनसे भी जानना चाहेंगे कि कोल बांध के हालातों को जानकर भी वे उद्घाटन के लिए कैसे तैयार हो गए।