प्रदेश में सत्ता बदलते ही दस हजार मेधावी विद्यार्थियों को लैपटॉप देने की योजना जारी रखने पर संशय बन गया है। पूर्व कांग्रेस सरकार की दसवीं और जमा दो कक्षा के पांच-पांच हजार मेधावी विद्यार्थियों को लैपटॉप देने की योजना बंद करने या जारी रखने को लेकर अफसरशाही पसोपेश में है। शिक्षा निदेशालय ने सरकार को पत्र लिखकर इस बाबत स्पष्टीकरण मांगा है।
सरकार से पूछा गया है कि क्या स्कूल शिक्षा बोर्ड के मेरिट में शुमार मेधावी विद्यार्थियों को लैपटॉप देने हैं या नहीं। कांग्रेस सरकार ने अपने कार्यकाल के दौरान स्कूल शिक्षा बोर्ड के मेरिट में शामिल दस हजार विद्यार्थियों को सम्मानित करने के लिए राजीव गांधी लैपटॉप योजना शुरू की थी।
योजना के तहत दसवीं और बारहवीं के पांच-पांच हजार मेधावी विद्यार्थियों को हर साल लैपटॉप दिए गए। अब प्रदेश में सत्ता परिवर्तन होते ही इस योजना को लेकर अफसर दुविधा में पड़ गए हैं। भाजपा ने विधानसभा चुनाव के दौरान अपने दृष्टिपत्र में स्कूली बच्चों को लैपटॉप देने का जिक्र नहीं किया।
भाजपा ने कॉलेज विद्यार्थियों को लैपटॉप देने की घोषणा की है। मार्च 2018 में मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने भी अपने पहले बजट भाषण में इस योजना का उल्लेख नहीं किया। ऐसे में क्या इस साल के मेधावी विद्यार्थियों को लैपटॉप मिलेंगे या नहीं, इसका फैसला नहीं हो पा रहा है। शिक्षा सचिव अरुण कुमार शर्मा का कहना है कि फिलहाल इस योजना को लेकर अभी कोई भी फैसला नहीं हो सका है।
वीरभद्र की फोटो हटा कर जयराम की फोटो लगाई
प्रदेश में नई सरकार बनते ही जनवरी में शिक्षा विभाग ने बीते साल के मेधावियों को दिए जा रहे लैपटॉप के वितरण पर रोक लगा दी थी। लैपटॉप के ऑन होते ही उसमें सबसे पहले पूर्व मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह की फोटो आती थी।
इस फोटो को हटाकर मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर की फोटो लगाने के लिए विभाग ने वितरण रोका था। करीब दो सप्ताह के बाद विभाग ने आईटी विशेषज्ञों की मदद लेकर फोटो में बदलाव कर लैपटॉप वितरित किए थे।