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9700 मेधावियों के लैपटॉप में फिर फंसा पेच, कंपनी मांग रही इतने करोड़

Sat, 29 Jun 2019 10:27 AM IST
अरविन्द ठाकुर न्यूज डेस्क, अमर उजाला, शिमला
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सांकेतिक तस्वीर
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स्कूल और कॉलेजों के 9700 मेधावियों को दिए जाने वाले लैपटॉप की खरीद में फिर पेच फंस गया है। लैपटॉप खरीद के लिए सरकार ने 18 करोड़ का बजट स्वीकृत किया है, जबकि इलेक्ट्रानिक कारपोरेशन के माध्यम से ओपन टेंडर में चयनित की गई कंपनी 23 करोड़ मांग रही है। छह करोड़ का अतिरिक्त वित्तीय खर्च की सूचना ने शिक्षा निदेशालय के अधिकारियों के होश उड़ा दिए हैं।

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मामले को सुलझाने के लिए अब बीते वर्षों में हुई लैपटॉप खरीद के बजट का मंथन शुरू कर दिया गया है। लैपटॉप खरीद के लिए पहली बार दो कंपनियों का चयन किया गया है। एल वन कंपनी को 60 फीसदी और एल टू कंपनी को 40 फीसदी सप्लाई ऑर्डर देने की बात कही गई है। राज्य इलेक्ट्रानिक कारपोरेशन ने टेक्निकल और फाइनेंशियल बिड के बाद दो कंपनियों का चयन कर फाइल अंतिम मंजूरी के लिए शिक्षा विभाग को भेजी है।

कारपोरेशन की फाइल ने शिक्षा विभाग के अधिकारियों की परेशानी बढ़ा दी है। कारपोरेशन के अनुसार ओपन टेंडर में 23 करोड़ की सबसे कम बिड प्राप्त हुई। इसके आधार पर कंपनी का चयन किया गया। इस बजट में खरीद करनी है या नहीं, यह शिक्षा निदेशालय ने तय करना है। उच्च शिक्षा निदेशक डॉ. अमरजीत कुमार शर्मा ने बताया कि इस मामले पर चर्चा की जा रही है। जरूरत पड़ी तो टेंडर रद्द कर शिक्षा विभाग अपने स्तर पर लैपटॉप की खरीद करेगा।

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बीते साल मेधावियों को लैपटॉप नहीं दे सकी सरकार

राज्य स्कूल शिक्षा बोर्ड की साल 2018-19 में हुई परीक्षाओं में दसवीं और जमा दो कक्षा के 8800 और कॉलेजों के 900 मेधावियों को लैपटॉप दिए जाने हैं। साल 2018 में मेधावी विद्यार्थियों को सरकार लैपटॉप नहीं दे सकी थी। साल 2012 में धूमल सरकार के समय शुरू की गई इस योजना को चलाने या बंद करने के संशय के बीच जयराम सरकार ने पूरा साल निकाल दिया।

जनवरी 2019 में सरकार ने लैपटॉप देने का फैसला लेते हुए स्कूलों के दस हजार मेधावियों की संख्या को कम करते हुए 8800 किया। इसमें दोनों कक्षाओं के 4400-4400 मेधावी शामिल किए गए। इसी योजना के तहत कॉलेजों के 900 मेधावी भी शामिल किए गए हैं।
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