प्रदेश सरकार ने कच्ची सड़कों और बरसात के दौरान भू स्खलन होने वाली सड़कों पर बसें न चलाने की हिदायत दी है। हिमाचल में ऐसे 35 रूट बताए जा रहे हैं जहां भू स्खलन होने की संभावना बनी रहती है। ऐसे में सरकार ने इन सड़कों पर बसें चलाने का रिस्क न लेने की बात कही है।
प्रदेश सरकार की ओर से सभी आरएम को यह निर्देश जारी किए गए हैं। इसके अलावा हिमाचल में प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना के तहत जो नई सड़कें बनी है। इसमें भी बसें चलने के लिए ऐहतियात बरतने को कहा गया है। मंडी के कोटरोपी में दिल दहलाने वाले हादसे से सबक लेते हुए परिवहन मंत्री जीएस बाली ने कहा कि बरसात से जगह-जगह भूस्खलन की आशंका है।
अगर लगे कि रास्ता खतरनाक है और ढांक से पत्थर गिर रहे हैं तो तो ड्राइवर सुरक्षित स्थानों पर बस खड़ी कर लें। बाली ने बताया कि बरसात से कुल्लू, मनाली, खड़ा पत्थर, चुराग पांगणा रोड, रामपुर और परवाणू सड़क में ल्हासे गिरने की आशंका रहती है। इन क्षेत्रों में ड्राइवरों को एहतियात बरतने को कहा गया है। इसके अलावा सरकार ने ओवरलोडिंग न करने की भी हिदायत दी है।
प्रभावित का जल्द होगा पुनर्वास
सरकार कोटरोपी हादसे की जद में आए गांवों के पुनर्वास का खाका तैयार करेगी। आपदा प्रबंधन तंत्र को ओर बेहतर बनाने के लिए भी संबंधित विभागों की बैठक होगी। मुख्य सचिव वीसी फारका ने कहा कि मामले को लेकर किसी तरह की जांच नहीं बैठाई गई है।
लेकिन आपदा प्रबंधन तंत्र को लेकर संबंधित विभागों की बैठक बुलाई जाएगी। उन्होंने कहा कि भूस्खलन को लेकर संवेदनशील क्षेत्रों का चिन्हीकरण पहले से किया गया है। मानसून से पहले सभी विभागों की हुई बैठक में प्राकृतिक आपदाओं को लेकर गाइडलाइन जारी की जा चुकी है।