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Himachal: जोशीमठ में भू-धंसाव ने हरे किए नाथपा गांव के जख्म, जानें पूरा मामला

Thu, 12 Jan 2023 12:35 PM IST
Krishan Singh बीरबल नेगी, संवाद न्यूज एजेंसी, सांगला (किन्नौर)

सार

जोशीमठ में भू-धसांव की घटना के बाद हिमाचल प्रदेश के किन्नौर जिले के निचार खंड के नाथपा गांव के जख्म फिर हरे हो गए हैं।
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नाथपा गांव - फोटो : संवाद
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विस्तार
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 उत्तराखंड के जोशीमठ में भू-धसांव की घटना के बाद हिमाचल प्रदेश के किन्नौर जिले के निचार खंड के नाथपा गांव के जख्म फिर हरे हो गए हैं। 9 जुलाई 2007 में नाथपा गांव के ऊपर शिल्ती और रिते पहाड़ियां अचानक दरकने लग गई थीं। चट्टानों की चपेट में आने से चार लोगों की मौत हो गई थी, जबकि प्रशासन ने सुरक्षा के लिहाज से नाथपा गांव में रह रही आबादी को खाली कर दूसरी जगह सार्क कंडे में बसाया। 21 जुलाई 2007 को भू वैज्ञानिकों की एक रिपोर्ट में नाथपा गांव को असुरक्षित घोषित कर दिया गया था। गांव से करीब 82 परिवार विस्थापित हो गए और सार्क कंडे में बसने चलने गए। सार्क कंडे में मूलभूत सुविधाएं न मिलने से विस्थापित 80 फीसदी आबादी फिर से नाथपा गांव में बस गई है। ताजा घटनाक्रम में जोशीमठ में लोगों की घरों में बड़ी-बड़ी दरारें आने के बाद नाथपा गांव के लोगों की चिंताएं बढ़ गई हैं।    

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डैम के निर्माण के लिए की गई थी अंधाधुंध ब्लास्टिंग 
एसजेवीएनएल (सतलुज जल विद्युत निगम) की ओर से नाथपा गांव के नीचे डैम और डाइवर्जन टनल के निर्माण को लेकर अंधाधुंध ब्लास्टिंग की गई थी। पहाड़ी में जोरदार धमाकों के कारण उथल पुथल मच गई और शिल्ती और रिते पहाड़ी से चट्टानों का दरकना शुरू हो गया था। इससे जान-माल का नुकसान हुआ। नाथपा गांव से विस्थापित हुए लोगों को सरकार से करीब 16.42 करोड़ रुपये का मुआवजा दिया था। 

सार्क कंडे में सुविधाएं न होने से नाथपा लौटे लोग  
विस्थापितों को सार्क कंडे में बसाया गया था। यहां न तो प्राथमिक पाठशाला है, न सामुदायिक भवन और न ही उपचार के लिए पीएचसी भवन तक बन पाया है। 15-15 दिन तक विद्युत आपूर्ति बाधित रहती है। ग्रामीण पेयजल किल्लत से भी जूझ रहे हैं। सड़क सुविधा भी नहीं है। भावावैली मोड़ से सार्क कंडे के लिए दो करोड़ का बजट उपलब्ध होने के बाद भी सड़क निर्माण नहीं हो पाया है। गांव के लिए 1892 मोड़ से स्पैन लगाया गया था। नौ साल बाद भी इस स्पैन को विद्युत आपूर्ति से नहीं जोड़ा है। ऐसी परिस्थितियों में नाथपा गांव से सार्क कंडे में विस्थापित हुए 80 फीसदी ग्रामीण आज दोबारा मौत के मुंह में रहने आ गए हैं। यही हाल नाथपा पंचायत के कंडार गांव का भी है। यहां से करीब 46 परिवारों को रूणी कॉलोनी में सुरक्षित जगह मुहैया करवाई गई थी।

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सार्क कंडे में मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध करवाए सरकार

नाथपा पंचायत प्रधान आरपी युलाम ने बताया कि पूर्व भाजपा सरकार ने सार्क कंडे में मूलभूत सुविधाओं को सुदृढ़ करने का कोई कार्य नहीं किया। करीब 80 फीसदी लोग नाथपा गांव में ही रहने को मजबूर हैं। पूर्व प्रधान नाथपा जयराम नेगी ने बताया कि गांव के नीचे परियोजना के निर्माण कार्य के चलते पहाड़ी में हलचल हुई थी, जिस कारण पहाड़ी से चट्टानें दरकने लगीं। पहाड़ी से चट्टानें दरकने का सिलसिला आज भी कायम है। पूर्व प्रधान अंजना नेगी ने प्रदेश सरकार और जिला प्रशासन से मांग की है कि नाथपा गांव के लोगों को सार्क कंडे में सभी मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध करवाएं, ताकि लोग सुरक्षित जीवन यापन कर सकें।  पूर्व उपप्रधान जगदेव नेगी ने बताया कि नाथपा गांव से नीचे परियोजना के डैम और डाइवर्जन टनल के निर्माण को लेकर भारी विस्फोट किए गए, जिस कारण पहाड़ी से चट्टानें दरकने लगीं।

पंचायत प्रतिनिधियों से रिपोर्ट मांगी जाएगी 
कार्यवाहक उपायुक्त किन्नौर एसएस राठौर ने बताया कि नाथपा गांव का मामला मेरे ध्यान में नहीं है। यदि वास्तव में ऐसा है तो एसडीएम भावानगर और पंचायत प्रतिनिधियों से रिपोर्ट मांगी जाएगी। वास्तविकता का पता लगाकर उचित कदम उठाए जाएंगे। 
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