चाबा पंपिंग स्टेशन पर पहाड़ से
गिरा मलबा, पानी की सप्लाई ठप
खड्ड का प्रवाह रुकने से बने तालाब में पंपिंग स्टेशन हुआ जलमग्न, दो कर्मचारी घायल पंपिंग स्टेशन की छत-दीवारें तोड़ते हुए अंदर गिरी चट्टानें
9:00 बजे सुबह दरका पहाड़,
परियोजना से तीन महीने तक नहीं मिला पानी
अमर उजाला ब्यूरो
शिमला। राजधानी की चाबा पेयजल परियोजना के पंपिंग स्टेशन पर शनिवार सुबह पहाड़ से मलबा गिर गया। सुबह करीब 9:00 बजे पहाड़ से बड़ी-बड़ी चट्टानें पंपिंग स्टेशन परिसर में आ गिरी। कई चट्टानें दीवारें, शीशे और छत तोड़ते हुए पंपिंग स्टेशन के भीतर घुस गई।
इस दौरान यहां एक इलेक्ट्रीशियन और बेलदार काम कर रहे थे। पत्थर गिरने से दोनों घायल हो गए हैं। इन्होंने तुरंत कंपनी अधिकारियों को सूचना दी। पहाड़ से गिरी चट्टानों से नौटी खड्ड का प्रवाह भी रुक गया। इसके बाद यहां विशालकाय तालाब बन गया और इसका सारा पानी पंपिंग स्टेशन में घुस गया। इससे पहले कि कर्मचारी कुछ कर पाते, पंपिंग स्टेशन जलमग्न हो गया। कर्मचारियों को मशीनरी बंद करने तक का समय नहीं मिला। पानी में जलमग्न होने से पंपिंग स्टेशन की करोड़ों रुपये की मशीनरी खराब हो गई है।
सूचना मिलते ही पेयजल कंपनी के एजीएम सुमित सूद, मैनेजर रंजीव शर्मा मौके पर पहुंचे। एसडीएम ग्रामीण निशांत ठाकुर भी पुलिस और लोक निर्माण विभाग के अधिकारियों के साथ चाबा पहुंचे। दोपहर 12:00 बजे जेसीबी लगाकर पंपिंग स्टेशन के पास बने तालाब को हटाने का काम शुरू किया। इसके लिए स्टेशन के पास लगाई गई 30 मीटर लंबी रिटेनिंग वॉल तोड़नी पड़ी। फिलहाल तालाब तो हट गया है लेकिन पहाड़ दरकने का खतरा बना हुआ है। कंपनी के मैनेजर रंजीव शर्मा ने बताया कि दोनों घायल कर्मचारियों को प्राथमिक उपचार के लिए अस्पताल ले जाया गया है।
शिमला के लिए ठप हो गई सप्लाई
पंपिंग स्टेशन की मशीनरी खराब होने से शिमला शहर के लिए इस परियोजना से पानी की सप्लाई ठप हो गई है। इससे अब शिमला शहर में पानी का शेड्यूल बिगड़ सकता है। परियोजना से शिमला को 10 एमएलडी तक पानी मिलता है। हालंाकि, आजकल दूसरी परियोजनाओं में पर्याप्त सप्लाई होने के कारण इससे चार से छह एमएलडी पानी ही ले रहे थे। सर्दी के मौसम में चाबा का पानी न मिलने से संकट गहरा सकता है। कंपनी के अनुसार पंपिंग स्टेशन ठीक करने में तीन से चार महीने लग सकते हैं। साल 2018 में शिमला शहर में हुए भीषण पेयजल संकट के बाद इस पंपिंग स्टेशन को बनाया था।
5 करोड़ की मशीनरी खराब, जल गए पंप
चाबा में कंपनी को करीब पांच करोड़ का नुकसान हुआ है। पानी में जलमग्न होने से आठ पंप, बिजली ट्रांसफार्मर, नौ मोटर, इलेक्ट्रिक पैनल, आटोमेशन समेत पंपिंग स्टेशन के अंदर लगी मशीनरी खराब हो गई है। कंपनी कर्मचारियों के अनुसार कई पंप जल गए हैं। यदि इन्हें बंद करने का मौका मिलता तो इन्हें खराब होने से बचाया जा सकता था।
अभी भी दरक रहा है पहाड़
मौके पर पहाड़ का एक हिस्सा अभी भी खतरनाक बना हुआ है। यह कभी भी दरक सकता है। पंपिंग स्टेशन में पानी और चट्टानें घुसने से मशीनरी को भारी नुकसान पहुंचा है। सप्लाई बहाल करने में कई महीने लग सकते हैं। काम शुरू करवा दिया है।
-सुमित सूद, एजीएम पेयजल कंपनी