25 सितंबर को जब मृत देह से इस बात के संकेत मिले कि अब लामा रिंपोछे ने शरीर को छोड़ दिया है तो इसे ताबूत में रखकर मंदिर के बीच रखा गया। बताया जा रहा है कि मृत शरीर को सहेजने के लिए उसे ताबूत में नमक डालकर रखा गया है।
जिगर बौद्ध मंदिर रिवालसर के सचिव थुपतिन हारा ने समाधि पूरी होने की पुष्टि की है। उन्होंने बताया कि लामा वांगडोर रिंपोछे का दाह संस्कार 6 नवंबर को मंदिर परिसर में ही किया जाएगा। उसी स्थान पर लामा का स्तूप बनाया जाएगा। तब तक मंदिर में पूजा-पाठ का सिलसिला जारी रहेगा।