हिमाचल सीमा के भीतर 35 किलोमीटर तक घुसे लेह और कारगिल कारोबारियों के मामले को लेकर लाहौल-स्पीति हरकत में आ गया है। लाहौल-स्पीति प्रशासन ने सोमवार को त्वरित कार्रवाई करते हुए वन विभाग कुल्लू के अरण्यपाल को पत्र जारी कर अपने अधिकारियों को शिंकुला और हिमाचल सीमा सरचू भेज कर रिपोर्ट तलब की है। दारचा पंचायत के लोगों का कहना है कि समय रहते दोनों छोर पर जमीन का निशानदेही की जाए।
अन्यथा, आने वाले समय में यह विवाद भयानक रूप धारण कर सकता है। कई वर्षों से जम्मू-कश्मीर के लेह के कारोबारी और वहदां की पुलिस हिमाचल सीमा के भीतर पर्यटक सीजन के बीच डेरा जमा देते हैं। जानकारी के मुताबिक हिमाचली कारोबारियों को आंख दिखाने के साथ उनके साथ मारपीट भी करते हैं। फॉरेस्ट सर्वे ऑफ इंडिया की टीम की ओर से किए सर्वे के चार साल भी यह मामला नहीं सुलझा है।
10 अगस्त 2015 को इसी मसले को लेकर हिमाचल और जम्मू-कश्मीर के प्रशासनिक अधिकारियों के बीच सरचू में बैठक हुई। उस दौरान लाहौल-स्पीति की ओर से यहां उपायुक्त रहे विवेक भाटिया और पुलिस अधीक्षक रमन कुमार मीणा तथा लद्दाख के उपायुक्त प्रसन्ना रामा स्वामी और कारगिल के डीसी मौजूद रहे। बैठक के बाद दोनों राज्यों के प्रशासनिक अधिकारियों ने अपने सरकार को निशानदेही के लिए लिखा था, लेकिन आज मामला विवादों तक ही सीमित है।
बैठक में सर्वे ऑफ इंडिया टीम के मेजर जनरल आरपी सेन की अगुवाई में टीम ने विवादित स्थल का दौरा किया था। टीम ने खुलासा किया था कि मानचित्र के मुताबिक वहां के पुलिस की अस्थाई चौकी व कारोबारी हिमाचल सीमा के 17 किमी अंदर घुसे हैं। अब कारगिल के कारोबारी रारिक छिका-जस्कर रूट पर शिंकुला से 35 किमी अंदर आकर कारोबार कर रहे हैं।
स्थानीय जिप सदस्य छिमेद लिमो ने कहा कि यह मामला काफी पेचीदा लग रहा है। रोहतांग टनल बनने के बाद दोनों साइट पर्यटक स्थल के रूप में विकसित होगा। विवाद और बढे़गा। पुलिस के उच्चाधिकारियों ने भी सोमवार को सीमा पर जाकर जायजा लिया है। उपायुक्त लाहौल-स्पीति केके सरोच ने कहा कि उन्होंने वन विभाग के अरण्यपाल से रिपोर्ट तलब की है।