तीन अक्तूबर से अधिष्ठाता भगवान रघुनाथ को समर्पित अंतरराष्ट्रीय देव समागम दशहरा उत्सव लंका दहन के साथ वीरवार को संपन्न हो गया है। लंका बेकर स्थित ब्यास नदी के तट पर वीरवार को भगवान रघुनाथ सहित दर्जनों देवी-देवताओं की उपस्थिति में लंका दहन की रस्म निभाई गई।
ढालपुर स्थित अपने अस्थायी शिविर से रथ पर सवार होकर लंका दहन के लिए रवाना हुए भगवान रघुनाथ की जयघोष से पूरा ढालपुर का वातावरण देवमय हो उठा। भगवान रघुनाथ की इस भव्य शोभायात्रा में उनके हजारों श्रद्धालुओं ने हिस्सा लिया और पुण्य कमाने के लिए रघुनाथ के रथ को खींचा।
उत्सव के अंतिम दिन लंका दहन के अलौकिक नजारे के हजारों लोग साक्षी बने। कड़े सुरक्षा घेरे में सात दिवसीय देव महाकुंभ के आखिरी दिन जिले के कई देवी-देवताओं के साथ रघुनाथ जी ने बुराई पर अच्छाई की विजय हासिल की।
इस मौके पर राजपरिवार के सदस्य एवं रघुनाथ जी के मुख्य छड़ीबरदार महेश्वर सिंह, कर्ण सिंह, कारदार दानवेंद्र सिंह, हितेश्वर सिंह और आदित्य विक्रम सिंह ने पारंपरिक वेश-भूषा में रघुनाथ जी की रथयात्रा की अगुवाई की।
रथ यात्रा पूरी होने पर रथ को पुन: रथ मैदान लाया गया। यहां से भगवान रघुनाथ जी अपनी पालकी में सवार होकर सुल्तानपुर स्थित अपने देवालय लौट गए।