जुन्गा (शिमला)। जुन्गा क्षेत्र के मुंडाघाट, छलंडा, कोटी और कुफरी घाटी बुरांस के फूलों से सराबोर है। बुरांस का पौधा अधिकांश ठंडे इलाकों में होता है। इसके लिए अधिक पानी की ज्यादा आवश्यकता नहीं होती है। इस फूल का प्रयोग अचार, मुरब्बा और जूस के रूप में किया जाता है। ग्रामीण परिवेश के लोग बुरांस के फूल बाजार में बेचने को भी लाते हैं जोकि लोगोें की आय का साधन बन गए हैं। क्षेत्र के वरिष्ठ व्यक्ति दयाराम वर्मा, दौलत राम मेहता ने बताया कि बुरांस के फूलों की चटनी बहुत स्वादिष्ट होती है। आयुर्वेद चिकित्सक डॉ. विश्वबंधु जोशी ने कहा कि बुरांस के फूल औषधीय गुणों से भरपूर है जिसका विभिन्न दवाओं में उपयोग किया जाता है। बुरांस में विटामिन ए, बी-1, बी-2, सी, ई और के प्रचुर मात्रा में पाई जाती है। संवाद