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गुड़िया रेप केस: सीबीआई से पूछ रहा पीटरहॉफ- अतिथि तुम कब जाओगे

Wed, 13 Dec 2017 01:06 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, शिमला
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राज्य अतिथि गृह पीटरहॉफ शिमला में छह कमरे सीबीआई के पास हैं। ऐसे में राज्य सरकार के अधिकारियों को रोजाना चिंता सता रही है कि सरकारी मेहमानों को कहां ठहराया जाए। केवल चार कमरों पर ही सरकारी रियायत दी जा रही है।
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बाकी कमरे दूसरी श्रेणियों में आते हैं। तीन महीने से ज्यादा वक्त से यहां सीबीआई गुड़िया मामले की जांच में डटी हुई है। कई बार सीबीआई से राज्य सरकार के अधिकारी पूछ चुके हैं कि कब तक कमरे खाली किए जाएंगे। हर बार जवाब मिलता है कि जब तक छानबीन पूरी नहीं हो जाती, तब तक यहीं रहना होगा। 

गुड़िया दुराचार और हत्या केस की जांच का जिम्मा मिलते ही सीबीआई ने सबसे पहले केंद्र सरकार के अतिथि गृह ग्रैंड होटल में अपना बेस कैंप लगाया। उसके बाद इस कैंप को पीटरहॉफ शिमला के लिए शिफ्ट कर दिया। शुरू में हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट की खंडपीठ ने भी मौखिक रूप से सीबीआई को होटल पीटरहॉफ को खाली करने की बात की।
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हालांकि, कोई लिखित आदेश नहीं मिलने के कारण सीबीआई ने इसे नहीं छोड़ा। अब सीबीआई को यहां डटे हुए तीन महीने से अधिक वक्त होने लगा है। सीबीआई ने राज्य अतिथि गृह में सर्किट हाउस हिस्से के छह कमरों को बुक करवाया है।
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नहीं हो पा रही रियायती बुकिंग

सीबीआई टीम के एसपी एसएस गुरुम, डीएसपी सीमा पाहूजा, एएसपी आरके सेठी
इनमें से चार कमरे बेसमेंट में हैं तो दो कमरे ऊपरी मंजिल में हैं। रियायत के बाद बेसमेंट का एक कमरा 300 रुपये में पड़ता है तो ऊपरी मंजिल का कमरा 600 रुपये में पड़ता है। बगैर रियायत के इन कमरों के दाम लगभग दोगुने हैं।

सारे कमरे डबल बेड वाले हैं। वैसे पीटरहॉफ में कुल 35 कमरे हैं। इनमें से 10 सर्किट हाउस के अंतर्गत आते हैं जबकि 17 वाणिज्यिक कमरे हैं, जिनमें कोई रियायत नहीं मिलती। छह राज्य अतिथि कक्ष हैं तो एक सीएम सुइट के तहत भी दो कमरे हैं।

राज्य सरकार के सामान्य प्रशासन विभाग (जीएडी) पर नेताओं और अफसरों के अलावा तमाम तरह के वर्गों का अपने मेहमानों को ठहराने का यहां दबाव रहता है, मगर बहाना केवल एक ही है कि सीबीआई ने कब्जा कर रखा है।

चार कमरों के अलावा कोई रियायती बुकिंग नहीं हो सकती। इस बारे में सामान्य प्रशासन विभाग के एक आला अधिकारी से बात की गई तो उन्होंने भी अपनी परेशानी बताई, मगर अपनी ओर से कोई टिप्पणी लिखने से इनकार किया।
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