मुख्याध्यापक मरीज हैं, पढ़ाने की स्थिति में नहीं हैं। हाल ही में आईं एक अन्य शिक्षिका मातृत्व अवकाश पर हैं। शुरू से स्कूल में टीजीटी मेडिकल, टीजीटी नॉन मेडिकल, शास्त्री, भाषा अध्यापक, कला अध्यापक समेत आधा दर्जन से ज्यादा पद खाली हैं।
अमर उजाला ने इस स्कूल का जायजा लिया। हमारे संवाददाता बीते दिन कच्ची कीचड़वाली सड़क से करीब पौने 12 बजे राजकीय उच्च पाठशाला जराई पहुंचे तो देखा कि कुछ बच्चे सफाई अभियान में लगे हैं तो कुछ बरामदे में किताबें खोले बैठे हैं।
कोई गपशप में वक्त गुजार रहा है। यहां इन बच्चों को पढ़ाने कोई नहीं आ रहा। मुख्याध्यापक बेशक स्कूल में हैं। उन्होंने बताया कि हाल ही में उनको पैरालिसिज का अटैक पड़ा है तो वे महज पंद्रह मिनट से ज्यादा नहीं बोल पाते या पढ़ा पाते। उनको चलने और बोलने में दिक्कत है।
फिर भी अकेले वही हैं, जिनकी स्कूल में नियमित हाजिरी है। स्कूल में तैनात शारीरिक शिक्षक किसी विभागीय कार्य से बाहर हैं। ऐसे विभागीय कार्य हमेशा रहते हैं। बच्चे विवश हैं। कुछ बच्चों ने रोनी सी सूरत बनाकर कहा कि वे न तो स्कूल में पढ़ पा रहे हैं और न ही इसे छोड़ने की स्थिति में ही हैं।
मालूूम नहीं, उनके भविष्य का क्या होगा। जहां हाईस्कूल में करीब 10 शिक्षक होने चाहिए, वहीं यह पाठशाला शिक्षा में अव्वल होने की बात करने वाले हिमाचल में शिक्षा प्रणाली को आईना दिखा रही है।
बच्चों के अभिभावक रामानंद शर्मा, गिरजानंद शर्मा, जगदीश, अंबादत्त शर्मा, नरेश आदि ने बताया कि वे शिक्षकों की कमी को पूरा करने के लिए कई बार शिक्षा मंत्री, शिक्षा निदेशक से मिल चुके हैं।
दूर होने के कारण वे बच्चों को दूसरे स्कूलों में नहीं भेज सकते। सरकार ने स्कूल खोलकर गरीब लोगों के बच्चों के साथ मजाक किया है। एसएमसी के प्रधान राकेश वर्मा और कलींड पंचायत के उप प्रधान वासुदेव शर्मा ने भी बच्चों के भविष्य से खिलवाड़ पर चिंता जताई।
सीएम बोले, जल्दी निकालेंगे समस्या का समाधान- अमर उजाला ने यह मामला मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर के ध्यान में भी लाया। उन्होंने इसका जल्दी कोई समाधान निकालने की बात कही है। सीएम बोले कि जराई स्कूल की तरह ही कुछ और स्कूलों में भी यही हाल है। सरकार गंभीर कदम उठाएगी।