सीबीआई का कहना है कि गुड़िया मामले की वैज्ञानिक तरीके से जांच की गई है। पुख्ता सुबूत के साथ जल्द ही पूरे मामले से पर्दा उठाया जाएगा। सीबीआई की दलीलें सुनने के बाद हाईकोर्ट ने 25 अप्रैल को दोबारा स्टेटस रिपोर्ट दायर करने के आदेश दिए हैं।
कार्यकारी मुख्य न्यायाधीश संजय करोल और न्यायाधीश संदीप शर्मा की खंडपीठ ने कहा, अगर 25 अप्रैल की स्टेटस रिपोर्ट में कोई पुख्ता जानकारी नहीं दी गई तो नौ मई को सीबीआई निदेशक को व्यक्तिगत तौर पर कोर्ट में पेश होकर निजी शपथपत्र दायर करना होगा।
उधर, हाईकोर्ट परिसर में मीडिया से बातचीत करते हुए सीबीआई के अधिवक्ता अंशुल बंसल ने बताया कि उनके हाथ पुख्ता सुबूत लगे हैं। अगली सुनवाई में आरोपियों को कोर्ट में पेश किया जाएगा।
बुधवार को भी मामले की हाईकोर्ट में सुनवाई हुई थी। सीबीआई ने बंद लिफाफे में हिमाचल हाईकोर्ट के समक्ष मामले की नौवीं स्टेटस रिपोर्ट पेश की थी। रिपोर्ट पेश कर सीबीआई ने कोर्ट से जांच करने के लिए तीन महीने का और समय देने की गुहार लगाई थी।
इस पर हाईकोर्ट ने कड़ी फटकार लगाते हुए आगामी सुनवाई के दौरान सीबीआई निदेशक को व्यक्तिगत तौर पर कोर्ट में पेश होने के आदेश दिए थे। इसी बीच दोपहर बाद सीबीआई के वकील दोबारा हाईकोर्ट पहुंच गए।
वकीलों ने मामले से जुड़े नए तथ्य सामने आने की बात कहते हुए वीरवार को मामले की दोबारा सुनवाई करने की मांग की। वीरवार को हुई सुनवाई में सीबीआई ने 25 अप्रैल तक आरोपियों को गिरफ्तार कर लेने का दावा करते हुए सभी को चौंका दिया।
सीबीआई ने गुड़िया रेप और हत्या मामले में 22 जुलाई 2017 को दिल्ली में एफआईआर दर्ज की थी। मामले की जांच 23 जुलाई 2017 से शुरू हुई। 10 जनवरी 2018 को सीबीआई ने मामले में 8वीं स्टेटस रिपोर्ट हाईकोर्ट में पेश की थी।
सीबीआई ने जांच पूरी करने के लिए हाईकोर्ट से तीन माह का अतिरिक्त वक्त मांगा था। हाईकोर्ट ने उस समय सीबीआई को जांच के लिए 78 दिन का समय दिया था।
गुड़िया मामले से जुड़े सूरज लॉकअप हत्याकांड मामले में नौ पुलिस अधिकारी, कर्मचारी गिरफ्तार हैं। सीबीआई ने आईजी जहूर जैदी, एसपी डीडब्ल्यू नेगी, डीएसपी मनोज जोशी सहित अन्य पुलिस कर्मियों को सूरज की हत्या, साजिश रचने और सुबूत नष्ट करने के आरोप में गिरफ्तार किया है।
यह सभी आरोपी कंडा जेल में न्यायिक हिरासत में हैं। जल्द ही सीबीआई द्वारा इन निलंबित पुलिस अधिकारियों और कर्मियों के वॉयस सैंपल लिए जाने हैं।
गुड़िया मामले को लेकर प्रदेश भर में उग्र विरोध प्रदर्शन हुए थे। बढ़ते जन आक्रोश के चलते पूर्व की कांग्रेस सरकार ने मामले की जांच सीबीआई को सौंपने का फैसला लिया था। हाईकोर्ट ने भी इस मामले को लेकर बरती गई लापरवाही के लिए प्रदेश सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए थे।