पानी और बिजली में भी सुरक्षित रहेगा हिमाचल का हिस्सा
मुख्यमंत्री ने कहा कि संशोधित समझौते के तहत सभी साझेदार राज्यों को बिजली और पानी में उनका वैध हिस्सा मिलेगा, वहीं हिमाचल प्रदेश को भी अपनी आवश्यकताओं के अनुरूप जलाशय से पर्याप्त पानी उपलब्ध कराया जाएगा। राज्य ने यमुना बेसिन में 378 मिलियन घन मीटर जल पर अधिकार सुरक्षित रखा है, जो भविष्य की जल आवश्यकताओं के दृष्टिकोण से अत्यंत महत्वपूर्ण है।
800 करोड़ के संभावित बोझ से बचा प्रदेश
बैठक में बताया गया कि किशाऊ परियोजना में हिमाचल के वित्तीय योगदान को लेकर पिछले लगभग आठ वर्षों से गतिरोध बना हुआ था। पूर्व भाजपा सरकार ने परियोजना में राज्य की हिस्सेदारी के रूप में करीब 800 करोड़ रुपये का योगदान देने पर सहमति जताई थी, लेकिन वर्तमान सरकार ने प्रदेश की वित्तीय स्थिति का हवाला देते हुए इसका विरोध किया।
बीबीएमबी से बिजली बकाये का मुद्दा भी उठाया
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार भाखड़ा ब्यास प्रबंधन बोर्ड (बीबीएमबी) की परियोजनाओं से हिमाचल प्रदेश को मिलने वाली 13,066 मिलियन यूनिट बिजली के लंबित बकाये को प्राप्त करने के लिए भी प्रयास तेज कर रही है। सर्वोच्च न्यायालय के आदेश के बावजूद यह मामला लगभग 15 वर्षों से लंबित है।