मामले को मजबूती से केंद्र के समक्ष उठाया था: सीएम
मुख्यमंत्री ने मीडिया के प्रतिनिधियों से बातचीत करते हुए कहा कि केंद्रीय गृह मंत्री की अध्यक्षता में 16 जून 2026 को हुई उच्च स्तरीय बैठक में हिमाचल प्रदेश की ओर से बिजली घटक पर आने वाली लगभग 2,000 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत को परियोजना के जल घटक से लाभान्वित होने वाले दिल्ली, राजस्थान और हरियाणा राज्यों की ओर से वहन करने पर केंद्र सरकार ने सैद्धांतिक रूप से सहमति व्यक्त की थी। उन्होंने कहा कि हिमाचल प्रदेश सरकार ने राज्य को इस अतिरिक्त वित्तीय बोझ से बचाने के लिए इस मामले को मजबूती से केंद्र के समक्ष उठाया था।
राज्य के हितों को प्राथमिकता देते हुए 800 के प्रस्ताव को अस्वीकार किया था
मुख्यमंत्री ने कहा कि पिछली सरकार ने राज्य की ओर से 800 करोड़ रुपये की वित्तीय हिस्सेदारी पर सहमति जताई थी, लेकिन वर्तमान सरकार ने प्रदेश के सीमित वित्तीय संसाधनों को ध्यान में रखते हुए राज्य के हितों को प्राथमिकता देते हुए इस प्रस्ताव को अस्वीकार कर दिया था। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार ने प्रमुखता से इस पक्ष को उठाया कि परियोजना के जल घटक के लिए केंद्र सरकार 90 प्रतिशत अनुदान प्रदान कर रही है और इस स्थिति में बिजली घटक के लिए इस प्रकार की सहायता उपलब्ध न करवाना अनुचित है।
हिमाचल को सर्वाधिक नुकसान का सामना करना पड़ेगा: सीएम
उन्होंने कहा कि परियोजना के कारण प्रदेश के संबंधित क्षेत्र की आबादी को विस्थापन का सामना करना पड़ेगा और इस परियोजना से हिमाचल को सर्वाधिक नुकसान का सामना करना पड़ेगा। इसलिए प्रदेश पर अतिरिक्त वित्तीय बोझ डालना अनुचित है और राष्ट्र की प्रगति में हिमाचल के बहुमूल्य योगदान की समुचित भरपाई की जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि परियोजना के बिजली घटक में हिमाचल प्रदेश को प्रतिवर्ष 1,000 मिलियन यूनिट बिजली की हिस्सेदारी मिलेगी। परियोजना के निर्माण के बाद इससे प्रदेश को प्रतिवर्ष 1,000 करोड़ रुपये से अधिक की आय होने की संभावना है, जो राज्य के सीमित वित्तीय संसाधनों को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित होगा। उन्होंने कहा कि वर्तमान प्रदेश सरकार ने हमेशा प्रदेशवासियों के हितों को सर्वोच्च प्राथमिकता दी है तथा विभिन्न मंचों पर प्रदेश के हितों को प्रभावी ढंग से उठाया है। उन्होंने कहा कि किशाऊ परियोजना में राज्य के वैध अधिकार और उचित हिस्सेदारी को सुरक्षित करना प्रदेश के हितों की रक्षा के संघर्ष में एक बड़ी जीत है। इस अवसर पर मुख्य सचिव केके पंत तथा अतिरिक्त मुख्य सचिव आरडी नजीम भी उपस्थित थे।