भारत सरकार के पर्यावरण जलवायु एवं परिवर्तन मंत्रालय देहरादून ने भी मान लिया है कि कीरतपुर-नेरचौक फोरलेन निर्माण के दौरान रोड अलाइनमेंट प्लान में बदलाव किया गया है। मंत्रालय के तकनीकी अधिकारी डॉ. योगेश गर्ग ने राज्य सरकार के अतिरिक्त मुख्य सचिव वन को पत्र लिखकर चार बिंदुओं में रिपोर्ट तलब की है।
प्रधान मुख्य वन अरण्यपाल वन शिमला, सीसीएस बिलासपुर, डीएफओ बिलासपुर और परियोजना निदेशक एनएचएआई शिमला को भी पत्र की कॉपी भेजी गई है। पूछा गया है कि एनएचएआई की कंपनी ने अपनी सुविधा के अनुसार कुल कितना रोड अलाइनमेंट प्लान बदला। तय प्लान के तहत कितने पेड़ काटे जाने थे और बदले अलाइनमेंट में कितने पेड़ काटे गए हैं। मलबा कहां डंप किया और जो मलबा ओवरफ्लो होने के कारण दूसरे स्थानों में पहुंचा, उसकी भी पूरी रिपोर्ट दी जाए।
अब जो नया काम शुरू होगा, उससे कितना मलबा निकलेगा और उसे कहां डंप किया जाएगा। सीसीएस बिलासपुर ने डीएफओ को पत्र जारी कर दिया है। इधर, फोरलेन विस्थापित समिति के उप प्रधान अशोक कुमार और महासचिव एवं पूर्व सैनिक मदन लाल शर्मा ने बताया कि अब साफ हो चुका है कि फोरलेन निर्माण में कोताही बरती है जिससे आम लोगों को भारी नुकसान हुआ है। उन्होंने सरकार से मांग की है कि इस मामले में कड़ी कार्रवाई अमल में लाई जाए।