रामपुर स्थित फैमिली कोर्ट किन्नौर ने एक अहम फैसले में पत्नी को गुजारा भत्ता देने से इन्कार कर दिया है। कोर्ट ने अवैध संबंध के आरोपों के चलते यह निर्णय लिया। हालांकि, न्यायालय ने उसके नाबालिग बेटे को पति से पांच हजार रुपये मासिक गुजारा भत्ता देने का आदेश दिया है। यह राशि पति को बेटे के बालिग होने तक मासिक रूप से देनी होगी।
पत्नी ने अपने और नाबालिग बेटे के लिए पति से 25 हजार रुपये मासिक गुजारा भत्ता मांगा था। उसने आरोप लगाया था कि पति ने उसे प्रताड़ित किया और एक अगस्त, 2022 को घर से निकाल दिया। पत्नी ने दावा किया कि पति सरकारी कर्मचारी है। उसकी मासिक आय 90 हजार रुपये है। उसे अपनी संपत्ति से पांच लाख रुपये सालाना भी मिलते हैं।
पति ने आरोपों का खंडन किया। उसने कहा कि उसकी पत्नी के एक व्यक्ति के साथ अवैध संबंध थे। उसने पत्नी को उस व्यक्ति के साथ आपत्तिजनक स्थिति में पाया था। पति ने यह भी दावा किया था कि यह बच्चा उसका बेटा नहीं है। हालांकि कोर्ट ने पति के दावों के बावजूद बच्चे को उसका नाबालिग बेटा माना।
न्यायालय ने कहा कि बच्चे का जन्म विवाह के दौरान हुआ था। पत्नी ने घर छोड़ने के नौ महीने के भीतर बेटे को जन्म दिया था। न्यायालय ने पाया कि पत्नी ने उक्त व्यक्ति के खिलाफ दुष्कर्म की दर्ज प्राथमिकी कराई थी, लेकिन जांच के दौरान बाद उसने अपने बयान वापस ले लिए थे। पुलिस ने इस मामले में रद्द करने की रिपोर्ट दाखिल की थी। कोर्ट ने निष्कर्ष निकाला कि पत्नी को पति की ओर से प्रताड़ित नहीं किया गया। बल्कि उसने ही पति के साथ क्रूरता की थी। इसलिए, पत्नी गुजारा भत्ता की हकदार नहीं है।