खुशवंत सिंह लिटफेस्ट में पहुंचीं नामी हस्तियां।
- फोटो : संवाद
कसौली में 11वें खुशवंत सिंह लिटफेस्ट में भारत और पाकिस्तान के बीच व्यक्तिगत संबंधों को सुधारने पर चर्चा हुई। स्व. खुशवंत सिंह के बेटे राहुल सिंह ने कहा कि भारत और पाक के बीच व्यक्तिगत संबंध ठीक होने चाहिए। तभी पाकिस्तान से भारत और भारत से पाकिस्तान की ओर उड़ानें शुरू होंगी। ऐसा होने से दोनों देशों के संबंधों में मजबूती आएगी। उन्होंने सरकार से दोनों पक्षों के सांस्कृतिक, साहित्यिक राजदूतों के अलावा वीजा नियमों में ढील देने की अपील की। कसौली क्लब में 11वां खुशवंत सिंह लिटफेस्ट का शुक्रवार से शुरू को शुरू हुआ। तीन दिन तक चलने वाले इस खुशवंत सिंह लिटफेस्ट में 24 सत्र होंगे। पहले दिन वातावरण के बदलाव समेत छह विषयों पर चर्चा की गई। इस दौरान प्रवक्ताओं ने दिए विषयों पर विचार रखे और मंथन किया। शुरूआत शुक्रवार को 11:00 बजे हुई। पहले दिन सात सत्रों में विभिन्न विषयों पर चर्चा की गई। पहले दिन अमिताभ घोष, क्रियूस ब्रॉचा, टू ब्लू, वंदना सक्सेना, राजमोहन गांधी ने विषयों पर मंथन कर अपने विचार रखे। खुशवंत सिंह के बेटे राहुल सिंह ने किया पहले सत्र का आगाज किया।
इसके बाद प्रसिद्ध लेखक और साहित्यकार अमिताभ घोष ने बदलते वातावरण के बारे में मंथन किया। जबकि सायरस ब्रॉचा, टू ब्लू और वंदना सक्सेना ने हाईजैक ऑफ यूअर माइंड के अलावा मल्लिका साराभाई और मालविका सांघ्वी ने इन फ्री फाल एक्सपीरियंस विद लाइफ, गौतम चक्रमनी, देवदीप गांगुली और मक्रंद प्रजापति, मोनिकआ ने श्री ऑरोबिंडो, राजमोहन गांधी और मॉइया मित्रा ने रिफ्लेक्शन ऑन 75 ईयर लिगेसी के विषय पर बातचीत की गई। वहीं शैली चोपड़ा और शाइजा इल्मी ने ऑफ बाय फॉर विमेन विषय पर अपने विचार रखे। शुरुआत में राहुल सिंह ने कहा कि वर्तमान विश्वभर में हो बदलावों के बारे में इस लिटफेस्ट में मंथन किया जाना है। उन्होंने कहा कि भारत और पाकिस्तान के बारे में भी चर्चा की और कहा कि इस बार पाकिस्तान से लिटफेस्ट में कोई नहीं पहुंचा है। इससे पहले पाकिस्तान से नामी हस्तियां खुशवंत सिंह लिटफेस्ट में पहुंचती थी।
प्रसिद्ध लेखक और साहित्यकार अभिताभ घोष ने कहा कि विश्वभर में वातावरण का हो रहा मशीन की तरह इस्तेमाल किया जा रहा है। न्यूक्लीयर वॉर के बाद अब यूक्रेन और रूस के बीच युद्ध से वातावरण के कई बदलाव आ रहे हैं। जो अब चिंता का विषय बनता जा रहा है। मानव वातावरण को बचाने की बजाय इसका तेजी से दोहन कर रहे हैं और धुआं भी वातावरण के बदलाव का कारण बन रहा है। जंगलों में आग लगने से फैलने वाले धुएं से वातावरण को तो नुकसान हो ही रहा है। साथ ही जंगली-जानवर भी परेशान हो रहे हैं। वहीं तेजी से पेड-पौधे काटे जा रहे है। खुशवंत सिंह लिटफेस्ट के पहले दिन वातावरण बदलाव पर चर्चा की गई। जिसमें साहित्यकार अभिताभ घोष मुख्य वक्ता रहे।
उन्होंने कहा कि तेजी से वातावरण में बदलाव हो रहा हैं। लेकिन किसी का इस ओर ध्यान नहीं दे रहा है। इसके चलते आगामी कछ समय में लोगों को दिक्कतें झेलनी पड़ेंगी। 90 के दशक के बाद लगातार बदलाव आए हैं। जिससे अब विश्वभर में बीमारियां भी तेजी से बढ़ रही हैं। उन्होंने कहा कि विश्व में कई लोग तो ऐसे हैं जो पेड़-पौधों के बारे में सोचते हैं। लेकिन कई लोग बिना सोचे समझे पेड़ों को काटने में लगे हुए हैं जो भविष्य में उन्हीं पर प्रभाव डालेगा और वातावरण को परिवर्तित करेगा। उन्होंने कहा कि 2500 पेड़ों के एक साथ काटे जाने पर वातावरण कहां से कहां पहुंच जाता है। जो मानव को पता भी नहीं है। इसलिए हमें संसाधनों का इस्तेमाल नियमानुसार करना आवश्यक है।