कहा, भारतीय संस्कृति और राष्ट्रभक्ति से जुड़े मूल्यों को शिक्षा व्यवस्था में देना होगा स्थान
राज्यपाल ने कहा कि लंबे समय तक हमारी शिक्षा व्यवस्था में मुगलों और अंग्रेजों की गुलामी के दौर से जुड़ी चीजों पर अधिक जोर रहा, लेकिन अब समय आ गया है कि भारतीय संस्कृति, स्वतंत्रता संग्राम और राष्ट्रभक्ति से जुड़े मूल्यों को शिक्षा व्यवस्था में अधिक स्थान दिया जाए। शिक्षा के माध्यम से विद्यार्थियों में राष्ट्र के प्रति गर्व और सांस्कृतिक चेतना विकसित करना जरूरी है।
लोक भवन में शपथ ग्रहण के बाद मीडिया से बातचीत में राज्यपाल ने कहा कि प्रदेश के विकास के लिए सरकार और विपक्ष दोनों को मिलकर काम करना होगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि राज्यपाल का पद सांविधानिक जिम्मेदारी का पद है और इस पद पर रहते हुए वह संविधान के दायरे में रहकर प्रदेश के सर्वांगीण विकास के लिए कार्य करेंगे। राज्यपाल किसी राजनीतिक दल से संबंधित नहीं होता, राज्य और समाज के समग्र विकास के लिए कार्य करता है। गुप्ता ने कहा कि वह आने वाले तीन से चार महीनों में हिमाचल प्रदेश के सभी 12 जिलों का दौरा करेंगे, जिससे जमीनी स्तर पर समस्याओं और विकास की संभावनाओं को समझा जा सके। पहाड़ी राज्यों की भौगोलिक परिस्थितियों से वह भली-भांति परिचित हैं। राज्यपाल ने अपने पूर्व अनुभव का जिक्र करते हुए कहा कि केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख में कार्य करते हुए उन्हें करीब से विकास कार्यों को देखने का अवसर मिला।
धारा 370 हटने और लद्दाख के केंद्र शासित प्रदेश बनने के बाद वहां विकास की गति तेज हुई है। उन्होंने लद्दाख में सात महीनों में दस हजार किलोमीटर से अधिक की यात्रा की और दूरदराज क्षेत्रों तक पहुंचे। उन्होंने कहा कि हिमाचल प्रदेश की भौगोलिक परिस्थितियां जम्मू-कश्मीर और लद्दाख से काफी मिलती-जुलती हैं। इसलिए यहां की चुनौतियों और जरूरतों को समझने में उन्हें आसानी होगी। राज्यपाल ने कहा कि पूर्व राज्यपाल आचार्य देवव्रत, राजेंद्र आर्लेकर और शिव प्रताप शुक्ल की ओर से शुरू किए गए कार्यों को भी आगे बढ़ाया जाएगा। उन्होंने कहा कि जनजातीय क्षेत्रों के विकास, प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने, युवा कल्याण और नशा मुक्ति अभियान को मजबूत बनाने पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।
पर्यटन और धार्मिक पर्यटन पर रहेगा फोकस
राज्यपाल ने कहा कि हिमाचल प्रदेश में पर्यटन, आतिथ्य और धार्मिक पर्यटन की अपार संभावनाएं हैं। इस विषय पर उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से भी चर्चा की है। पर्यटन को बढ़ावा देने के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण, हरित क्षेत्र के विस्तार और सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण पर भी विशेष ध्यान दिया जाएगा। सीमावर्ती क्षेत्रों के विकास के लिए केंद्र सरकार की योजनाओं जैसे वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम को भी प्रभावी ढंग से लागू करने के प्रयास किए जाएंगे, जिससे दूरदराज क्षेत्रों में बुनियादी सुविधाओं और कनेक्टिविटी को बेहतर बनाया जा सके। चीन से लगते सीमा क्षेत्रों के विकास को विशेष महत्व दिया जाएगा।
कौशल विकास और युवाओं पर विशेष जोर
- राज्यपाल ने कहा कि देश की लगभग 65 प्रतिशत आबादी युवा है। इसलिए युवाओं को केवल नौकरी खोजने वाला नहीं, बल्कि रोजगार देने वाला बनाने की आवश्यकता है। इसके लिए कौशल विकास आधारित शिक्षा को बढ़ावा देना जरूरी है। उन्होंने कहा कि प्रदेश के विश्वविद्यालयों के कुलाधिपति (चांसलर) होने के नाते शिक्षा की गुणवत्ता सुधारना उनकी प्राथमिकताओं में रहेगा। राष्ट्रीय शिक्षा नीति को प्रभावी ढंग से लागू करते हुए भारतीय मूल्यों और आधुनिक शिक्षा के समन्वय पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।
नशे के खिलाफ समाज को भी निभानी होगी भूमिका
राज्यपाल ने नशे की बढ़ती समस्या पर चिंता जताते हुए कहा कि यह समाज के लिए एक नासूर बनता जा रहा है। नशे की समस्या केवल सरकार के प्रयासों से खत्म नहीं होगी, बल्कि समाज के सभी वर्गों को इसमें सक्रिय भूमिका निभानी होगी। युवाओं को सकारात्मक गतिविधियों से जोड़ने के लिए खेल और अन्य कार्यक्रमों को बढ़ावा दिया जाएगा। खेलो इंडिया जैसी पहल को भी इससे जोड़ा जा सकता है। उन्होंने कहा कि हिमाचल प्रदेश शिक्षा के क्षेत्र में अग्रणी राज्य है और वे राज्य में शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने पर विशेष ध्यान देंगे।