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घाटी के हालात की जानकारी न मिलने से कुल्लू में कश्मीरी परेशान, अपनों से नहीं हुई बात

Tue, 06 Aug 2019 05:00 AM IST
Krishan Singh रोशन ठाकुर, अमर उजाला, कुल्लू
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- फोटो : अमर उजाला
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जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 और राज्य का दर्जा समाप्त करने से कुल्लू, मनाली में रह रहे सैकड़ों कश्मीरी कामगारों में हड़कंप मच गया है। जम्मू-कश्मीर की हलचल को देखते हुए कई कश्मीरी दो-तीन दिनों से अपने कामकाज पर नहीं गए और फोन से घाटी का अपडेट लेते रहे। सोमवार को घाटी में दूरसंचार सेवा बंद होने से कश्मीरी लोग केंद्र सरकार के फैसले से बेचैन दिखे। सोमवार सुबह करीब 11 बजे ढालपुर चौक में सन्नाटा पसरा रहा। 

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यहां रोजाना काम के लिए एक दर्जन से अधिक कश्मीरी मौजूद रहते थे। लेकिन केंद्र सरकार के फैसले के बाद यहां तीन कश्मीरी बारामूला निवासी बशीर, रजाक और बांदीपुरा के अब्दुल्ला खालिक ही मौजूद थे। बात करने पर बशीर ने केंद्र सरकार के इस फैसले का विरोध किया और कहा कि कश्मीर के लोगों को अनुच्छेद 370 के तहत अधिकार प्राप्त थे जिसे हटाना सही नहीं है।

उन्होंने कहा कि कश्मीर में भारत-पाकिस्तान सीमा से सटे गांव के लोगों के पास रोजगार नहीं है। जिसके चलते वह पिछले 25 सालों से कुल्लू में काम कर अपने परिवार को पालन पोषण करते हैं। बांदीपुरा के अब्दुल्ला खालिक व जुनैद खान ने कहा कि सीमा के साथ रहने वाले लोग बेचैनी के साथ जी रहे हैं। ऐसे में कश्मीरी अवाम अमन और रोजगार दिलाने की मांग करती है। 

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कुल्लू-मनाली में रोजगार की तलाश में आते हैं 2000 कश्मीरी 

- फोटो : अमर उजाला
उन्होंने कहा कि वह पिछले तीन-चार दिनों से काफी परेशान हैं। रविवार रात से वह परिजनों को फोन मिलाने की कोशिश कर रहे हैं लेकिन उनकी बात नहीं हो पाई है। ऐसे में वह बीच-बीच में दुकानों व ढाबों में लगे टीवी से घाटी के हालात की जानकारी लेते रहे।

मुश्ताक, ताहिर खान, अब्दुल्ला ने कहा कि जम्मू-कश्मीर से धारा 370 हटाने और राज्य का दर्जा खत्म करने से भारत-पाकिस्तान के बीच तनाव और ज्यादा बढ़ेगा। उन्होंने कहा कि हालात को देखते हुए वह अगले हफ्ते तक अपने घर जाएंगे।

 जम्मू से रोजगार के लिए कुल्लू आए कश्मीरी पंडित बाबू राम शर्मा सोमवार को ढालपुर में गोल गप्पे बेच रहे थे। लेकिन जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 और राज्य का दर्जा छिनने पर खुश बाबू राम ने कहा कि अब घाटी में खुशियां आएंगी। साथ ही अपने राज्य में रोजगार कर सकेंगे।

उन्होंने इसके लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृहमंत्री अमित शाह को आभार जताया है। जम्मू-कश्मीर में रोजगार के अवसर नहीं होने से जिला कुल्लू में दो हजार से अधिक कश्मीरी काम के लिए आते हैं। वे सामान ढुलाई, सेब सीजन और कंबल बेचने का काम करते हैं।
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