कसौली के घने जंगलों में लगी भीषण आग को भारतीय सेना ने पूरी तरह बुझा दिया है। दिन-रात लगातार 15 घंटे से ज्यादा समय तक चले मेहनत भरे अभियान के बाद आग पर काबू पा लिया गया। इस काम में भारतीय सेना और भारतीय वायुसेना ने मिलकर बेहतरीन काम किया।
26 मई 2026 को दोपहर करीब 3 बजे कसौली के पश्चिमी ढलानों पर स्थित गिल्बर्ट ट्रेल और अपर मॉल इलाके में आग लगी। जंगल में सूखी घास, पाइन की पत्तियां और घना जंगल होने की वजह से आग बहुत तेजी से चारों तरफ फैलने लगी। आग की लपटें काफी ऊंची उठ रही थीं और हवा के साथ आगे बढ़ रही थीं। अगर समय रहते काबू न किया जाता तो आग आसपास के संवेदनशील वन क्षेत्रों और बस्तियों तक पहुंच सकती थी।
सेना का तुरंत रेस्क्यू अभियान
सूचना मिलते ही भारतीय सेना की कसौली ब्रिगेड ने तुरंत कार्रवाई शुरू कर दी। सेना के जवान जंगलों में घुसकर आग बुझाने का काम करने लगे। उन्होंने आग को फैलने से रोकने के लिए फायरब्रेक बनाए, यानी आग वाली जगहों को काट-छांटकर अलग कर दिया। फायर टेंडर और पानी के टैंकरों की मदद से जमीन पर लगातार पानी डाला गया। सबसे मुश्किल काम रात में हुआ। सेना के जवान रात भर जागकर आग बुझाते रहे। साथ ही भारतीय वायुसेना ने भी बड़ी मदद की। वायुसेना के हेलीकॉप्टरों ने पास की सुखना झील से पानी भरा और बम्बी बकेट के जरिए आग पर पानी की बौछारें डालीं। हेलीकॉप्टरों की कई उड़ानें दिन और रात दोनों समय की गईं।
अभी क्या है स्थिति?
27 मई को आग को पूरी तरह काबू में कर लिया गया है। सेना के जवान अभी भी इलाके में मौजूद हैं। वे छोटे-छोटे बचे हुए धुएं वाले जगहों (हॉटस्पॉट्स) को पूरी तरह ठंडा कर रहे हैं ताकि आग दोबारा न भड़के। पूरे इलाके की निगरानी की जा रही है। बड़ी राहत की बात यह है कि इस आग में किसी भी व्यक्ति की मौत या चोट नहीं आई। सेना के सभी जवान और इस्तेमाल किए गए उपकरण पूरी तरह सुरक्षित हैं।
आर्मी कमांडर ने किया दौरा
पश्चिमी कमान के आर्मी कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल पुष्पेन्द्र सिंह (एवीएसएम, एसएम) ने खुद आग वाले इलाके का दौरा किया। उन्होंने मौके पर जाकर पूरे अभियान की समीक्षा की और जवान की मेहनत देखी। आर्मी कमांडर ने कठिन परिस्थितियों में काम करने वाले जवानों की बहादुरी, साहस और अथक मेहनत की तारीफ की। उन्होंने अभियान में शामिल कई जवानों को ऑन-द-स्पॉट प्रशंसा पत्र (तुरंत प्रशस्ति पत्र) भी दिए।
सेना की तैयारियों का उदाहरण
यह सफल अभियान एक बार फिर दिखाता है कि भारतीय सेना और वायुसेना प्राकृतिक आपदाओं के समय कितनी तेजी से और मिलकर काम करती है। जंगल की आग बुझाने जैसे काम में दोनों बलों का समन्वय बहुत अच्छा रहा। कसौली और आसपास के इलाकों में इस मौसम में जंगल की आग की घटनाएं आम हैं, लेकिन सेना की मदद से नुकसान को बहुत कम किया जा सका।स्थानीय प्रशासन और नागरिकों ने भी सेना के इस प्रयास की सराहना की है। यह अभियान न सिर्फ पर्यावरण की रक्षा करता है बल्कि आसपास की बस्तियों और पर्यटक स्थलों को भी सुरक्षित रखता है।