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सोलह साल बाद पहली बार अपने गुरु से मिलेंगे करमापा

Mon, 28 Nov 2016 10:47 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, धर्मशाला
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तिब्बती बौद्ध धर्म के तीसरे सबसे बड़े काग्यू सेक्ट (मठ एवं स्कूल) के मुखिया करमापा उग्येन त्रिनले दोरजे 16 साल बाद पहली बार 9 दिसंबर को अपने गुरु ताई सितु रिंपोछे से मिलेंगे। चीनी जासूस होने के शक पर भारत सरकार के विदेश मंत्रालय ने दोनों के मिलने पर पहले प्रतिबंध लगा दिया था।
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भारत आने के बाद करमापा 55 किमी दूर बैजनाथ के भट्टू में शेराबलिंग मठ में रहने वाले अपने गुरु ताई सितु रिंपोछे से नहीं मिल पाए। अब भट्टू में 8 से 11 दिसंबर तक होने वाले बुद्धिस्ट सांस्कृतिक कार्यक्रम के दौरान दोनों की मुलाकात होगी। आईबी के उच्च पदस्थ सूत्रों के अनुसार विदेश मंत्रालय ने करमापा को कार्यक्रम में जाने की इजाजत दे दी है। करमापा पर अपने गुरु से मिलने का प्रतिबंध हटने को लेकर चीन सरकार क्या प्रतिक्रिया देती है, यह देखना भी दिलचस्प होगा।

दलाईलामा के बाद दूसरे महत्वपूर्ण पद पर है करमापा
बौद्ध धर्म में अलग-अलग मठ होते हैं। इनमें से एक काग्यू सेक्ट है। काग्यू सेक्ट के मठाधीश करमापा उग्येन त्रिनले दोरजे हैं। वह 17वें करमापा हैं। दलाईलामा के बाद करमापा सबसे बड़ी पदवी मानी जाती है। करमापा उग्येन त्रिनले दोरजे 5 जनवरी, 2000 को तिब्बत से भागकर धर्मशाला पहुंचे थे।
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कौन है करमापा के गुरु ताई सितु रिंपोछे
करमापा के गुुरु ताई सितु रिंपोछे बौद्ध धर्म के तीसरे रैंक काग्यू सेक्ट के सबसे बड़े लामा हैं। ताई सितु रिंपोछे ने ही वर्ष 1992 में 17वें करमापा का नाम घोषित किया था। ताई सितु छोटी उम्र में ही कांगड़ा जिले के भट्टू में आ गए थे। ताई सितु बौद्ध धर्म में सबसे बड़े तांत्रिक मठ शेरबलिंग मठ का संचालन करते हैं।

विवादों में रहे हैं गुरु और शिष्य
भारत आने के बाद करमापा भारतीय सुरक्षा एजेंसियों की कड़ी निगरानी में धर्मशाला के पास सिद्धबाड़ी स्थित ग्यूतो तांत्रिक मठ में रहे। चीनी जासूस का संदेह होने के शक के चलते वर्ष 2009 तक उन पर विदेश जाने पर प्रतिबंध था। 2011 में करमापा मठ से 6.5 करोड़ रुपये की चीनी करेंसी युआन और विदेशी नोट पकड़े थे।

ताई सितु रिंपोंछे भी कई विवादों में रहे। कुछ वर्ष पहले भारत सरकार ने उनके निष्कासन के आदेश दिए थे। वहीं, भट्टू स्थित तांत्रिक मठ से भूटान के रजिस्ट्रेशन की चार महंगी करोड़ों की गाड़ियां पकड़ी गई थीं।
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