अमेरिका के पड़ोसी देश डोमिनकन रिपब्लिक की नागरिकता लेने के बाद बौद्ध धर्मगुरु 17वें करमापा की भारत वापसी की राह में पासपोर्ट और रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट जमा न करवाना रोड़ा बन गया है। विदेश मंत्रालय के पुख्ता सूत्रों के अनुसार पिछले डेढ़ साल से ज्यादा समय से 17वें करमापा उग्येन त्रिनले दोरजे अमेरिका में रह रहे हैं।
अब उन्होंने भारत आने को ई वीजा के लिए आवेदन तो कर दिया, लेकिन भारत आने के लिए डोमिनकन रिपब्लिक देश का पासपोर्ट और भारत से जारी रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट भारतीय दूतावास में जमा नहीं करवा रहे हैं। इसी वजह से विदेश मंत्रालय करमापा दोरजे को ई वीजा जारी नहीं कर रहा है। इस सारे घटनाक्रम के बीच करमापा के भारत आने की अटकलों पर संशय बढ़ता जा रहा है।
बौद्ध धर्म के 4 प्रमुख संप्रदायों में से एक करमा काग्यू के उग्येन त्रिनले दोरजे जनवरी 2000 में भारत आए थे। भारत में करमापा को शरणार्थी का दर्जा प्राप्त था। कहीं भी बाहर आने-जाने के लिए भारत सरकार की ओर से उन्हें पासपोर्ट की जगह रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट जारी किया गया था। मई 2017 में स्वास्थ्य संबंधी कारणों का हवाला देकर करमापा यूरोप चले गए।
इसके बाद उन्होंने भारत सरकार को बिना बताए डोमिनकन पब्लिक की नागरिकता ले ली। दूसरे देश की नागरिकता लेने के चलते अब भारत आने के लिए उन्हें नियमानुसार वीजा के लिए आवेदन करना था। करमापा ने भारत आने के लिए ई वीजा के लिए आवेदन तो कर दिया, लेकिन पासपोर्ट और आरसी जमा न करवाने के लिए वीजा जारी करने की प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ पा रही है।