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हिमाचल के 54 जवानों को सलाम, जान देकर जीती कारगिल की लड़ाई

Tue, 26 Jul 2016 06:29 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, शिमला
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कारगिल की लड़ाई में हिमाचल के इन बहादुरों ने दुश्मनों को मार गिराया था। - फोटो : अमर उजाला
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कारगिल युद्ध में हिमाचल के साढ़े चार दर्जन वीर जवानों ने अपने प्राणों की आहुति देकर विजय गाथा लिखी। ऑपरेशन विजय में सूबे के 54 जवान शहीद हुए। कारगिल युद्ध में दुश्मन सेना के दांत खट्टे करने वाले जांबाज आज भी लोगों के दिलों में जिंदा हैं।
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देश की सरहदों पर कुर्बानी देने में जिला हमीरपुर भी पीछे नहीं रहा। कारगिल युद्ध में यहां से आठ जवान शहीद हुए। वहीं, प्रशासन भी इन्हें सम्मान देने में पीछे नहीं रहा। इनके नाम पर जो घोषणाएं हुईं, वे पूरी की गई हैं।

ग्राम पंचायत बगवाड़ा के समलेहड़ा गांव के शहीद हवलदार स्वामी दास चंदेल के नाम पर बगवाड़ा में अस्पताल खोला गया। उपमंडल बड़सर के कुलेहरा गांव के शहीद प्रवीन के नाम पर सड़क का निर्माण किया गया है।
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उनके नाम पर क्षेत्र में एक स्कूल का नामकरण भी किया गया है। ऊहल गांव से 14 जैक रेजिमेंट के शहीद हवलदार कश्मीर सिंह के नाम पर सलौणी में पेट्रोल पंप खोला गया है। उनके बेटे को सेना में नौकरी मिली है।

कारगिल युद्ध में हमीरपुर के ये सैनिक हुए शहीद

कारगिल युद्ध में हिमाचल के साढ़े चार दर्जन वीर जवानों ने अपने प्राणों की आहुति देकर विजय गाथा लिखी। - फोटो : फाइल फोटो
कारगिल युद्ध में जिले से आठ सैनिकों ने शहादत पाई। ऊहल गांव के 14 जैक रेजिमेंट से हवलदार कश्मीर सिंह और कक्कड़ गांव के 14 जैक रेजिमेंट से हवलदार राजकुमार पांच जून को शहीद हुए।

ऊहल गांव के तृतीय पंजाब रेजिमेंट से सिपाही दिनेश कुमार 17 जून को शहीद हो गए थे। बड़सर के समलेहड़ा के 12 ग्रिनेडियर के हवलदार स्वामी दास चंदेल तीन जुलाई को शहीद हुए थे।

सुजानपुर के बीड़ बगेहड़ा से 27 राजपूत रेजिमेंट के सिपाही राकेश कुमार ने पांच जुलाई को शहादत का जाम पिया। बड़सर के सुनाहनी से 3 जैक रेजिमेंट के प्रवीन कुमार छह जुलाई को शहीद हुए।

पंचायत अमरोह के ठनियानका गांव से 28 आरआर रेजिमेंट के सुनील कुमार 18 जुलाई को शहीद हुए थे। बड़सर के बरोटी से 13 जैक रेजिमेंट के दीप चंद छह जुलाई को शहीद हुए थे।

डोलाराम को सलाम, 17 पाकिस्तानी घुसपैठियों को मार गिराया

हिमाचल के इन जवानों को भी सलाम। कारगिल विजय में देश इनकी बहादुरी को कभी नहीं भूलेगा। - फोटो : अमर उजाला
तीन जुलाई, 1999 को कारगिल युद्ध में शहीद हुए वीर सुपूत को हिमाचल के आनी क्षेत्र का शकरोली गांव आज भी फख्र से याद करता है। पाकिस्तानियों की ओर से घुसपैठ हो रही थी तो उसे रोकने के लिए ऑपरेशन ‘विजय’ में शहीद डोला राम सहित तीन सैनिकों को उनकी काबलियत और अदम्य साहस को देखते हुए सियाचिन की चोटी पर दुश्मनों की पोजिशन पर नजर रखने के लिए भेजा गया।

डोला राम अपने दोनों साथियों सहित चोटी पर चढ़े तो उन्होंने देखा कि वहां पर नजदीक में ही बने एक बंकर में पाकिस्तानी घुसपैठियों की हलचल बढ़ रही है। उन्होंने बिना समय गंवाए बंकर पर हमला बोल दिया।

बंकर में उन्होंने 17 पाकिस्तानी घुसपैठियों को मार गिराया और इस बीच उनके सीने पर दुश्मनों ने पांच गोलियां दाग दीं। इससे वे देश के लिए कुर्बान हो गए और उन्होंने आपरेशन ‘विजय’ की सियाचिन की गाथा लिख डाली। डोला राम एक बेहतर बॉक्सर के साथ-साथ पर्वतारोही थे।
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कारगिल में हिमाचल के इन जवानों ने दिया सर्वोच्च बलिदान

कांगड़ा जिले के शहीद

कै. विक्रम बत्तरा (परमवीर चक्र)
सौरभ कालिया, बजिंद्र सिंह, राकेश कुमार, वीर सिंह, अशोक कुमार, सुनील कुमार, लखवीर सिंह, ब्रह्मदास, जगजीत सिंह, संतोख सिंह, सुरेंद्र सिंह, पदम सिंह, सुरजीत सिंह, योगेंद्र सिंह।

जिला मंडी-दीपक गुलेरिया, खेम चंद राणा, कृष्ण चंद, सरवण कुमार, टेक सिंह मस्ताना, राकेश कुमार चौहान, नरेश कुमार, हीरा सिंह, पूर्ण चंद, गुरदास सिंह, मेहर सिंह, अशोक कुमार।

जिला बिलासपुर-उधम सिंह (वीर चक्र), मंगल सिंह, विजय पाल, राजकुमार, अश्वनी कुमार, प्यार सिंह, मस्तराम।

जिला शिमला-यशवंत सिंह, श्याम सिंह (वीर चक्र), नरेश कुमार, अनंतराम।

जिला ऊना-अमोल कालिया (वीर चक्र), मनोहर लाल।

जिला सोलन के शहीद-धर्मेंद्र सिंह, प्रदीप कुमार।

जिला सिरमौर के शहीद-कुलविंद्र सिंह, कल्याण सिंह (सेना मेडल)।

जिला चंबा के शहीद-खेम राज

जिला कुल्लू के शहीद-डोला राम--
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