कंदरौर-हमीरपुर नेशनल हाईवे की टारिंग में घटिया सामग्री इस्तेमाल करने के लिए पांच इंजीनियरों पर गाज गिरना तय है। जांच पूरी होने के बाद सरकार ने इन अफसरों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। इन अफसरों में चीफ इंजीनियर नेशनल हाईवे, अधीक्षण अभियंता नेशनल हाईवे, अधिशाषी अभियंता, सहायक अभियंता और जूनियर इंजीनियर शामिल हैं। मंगलवार को मुख्यमंत्री कार्यालय की ओर से इस संबंध में आदेश जारी कर दिए हैं। इसी के साथ ठेकेदार को भी नए सिरे से टारिंग करने के निर्देश दिए गए हैं।
केंद्र ने कंदरौर से हमीरपुर के बीच करीब 45 किलोमीटर नेशनल हाईवे को चौड़ा करने के लिए 280 करोड़ रुपये जारी किए थे। इस राशि से सड़क पर पुलों का निर्माण और सड़क चौड़ा करने के साथ टारिंग का काम किया गया। लेकिन घटिया कार्य की आशंका के चलते लोगों ने इसकी शिकायत मुख्यमंत्री कार्यालय से कर दी।
प्रारंभिक रिपोर्ट के बाद मुख्यमंत्री कार्यालय के अधीन गठित क्वालिटी कंट्रोल सेल ने इस निर्माण में हुई कथित धांधली की जांच की। बाकायदा मुख्यमंत्री कार्यालय के अधीन कमेटी ने मौके का निरीक्षण किया। कमेटी ने अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंप दी है। रिपोर्ट में काफी गड़बड़ी बताई गई है। इसके चलते अफसरों पर कार्रवाई की जा रही है।
मुख्यमंत्री प्रधान सचिव व क्वालिटी कंट्रोल सेल के प्रभारी संजय कुंडू मामले में खेल करने वाले अधिकारियों और ठेकेदारों के खिलाफ कार्रवाई को लेकर फैसला लेंगे। कुंडू ने बताया कि प्रदेश में काम की गुणवत्ता से किसी कीमत पर कोई समझौता नहीं किया जाएगा।