पॉटर हिल को ईको टूरिज्म के दृष्टिकोण से विकसित करने के लिए 5 हेक्टेयर भूमि की मिली है स्वीकृति
परियोजना पर 77 लाख रुपये का खर्च होने का अनुमान
समरहिल से सड़क का निर्माण जारी
विकास की बात
संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। समरहिल के पॉटर हिल को वन्य जीव संरक्षण क्षेत्र घोषित करने के बाद अब यहां ईको टूरिज्म और कैंपिंग साइट्स के विकास का कार्य तेजी से शुरू हो गया है। सरकार की योजना के तहत पॉटर हिल को ईको टूरिज्म हब के रूप में विकसित किया जा रहा है, ताकि पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ पर्यटन को भी बढ़ावा दिया जा सके। इस परियोजना पर कुल 77 लाख रुपये का खर्च अनुमानित है, जिसमें से 50 लाख रुपये एशियन डिवेलपमेंट बैंक के सहयोग से खर्च किए जाएंगे।
पॉटर हिल को ईको टूरिज्म के दृष्टिकोण से विकसित करने के लिए 5 हेक्टेयर भूमि की स्वीकृति हाल ही में प्रदेश सरकार ने दी है। इस परियोजना के अंतर्गत वॉकिंग ट्रेल्स, माउंटेन साइक्लिंग ट्रेल्स और अन्य पर्यावरण-अनुकूल सुविधाओं का विकास किया जाएगा। इसके साथ ही 27 लाख रुपये की लागत से यहां कैंपिंग साइट्स भी बनाई जा रही हैं। कैंपिंग साइट्स का टेंडर चंडीगढ़ के एक निजी ठेकेदार को दिया गया है और काम जल्द ही पूरा होने की उम्मीद है। इसके अलावा पॉटर हिल तक बेहतर पहुंच के लिए समरहिल से पॉटर हिल तक सड़क का निर्माण भी जारी है, जिससे पर्यटकों को आसानी से यहां तक पहुंचने में सुविधा हो सके। इस परियोजना में स्थानीय समुदाय की भागीदारी सुनिश्चित की गई है।
कंजर्वेटर वाइल्ड लाइफ प्रीति भंडारी ने बताया कि पॉटर हिल के जंगल को संरक्षित करने के बावजूद स्थानीय निवासियों के हितों का ध्यान रखा जाएगा। इसके लिए संरक्षण रिजर्व प्रबंधन समिति का गठन किया गया है, जिसमें वन विभाग, कृषि विभाग, उद्यान विभाग और स्थानीय पंचायतों के प्रतिनिधि शामिल होंगे।
आर्बोरेटम का हो चुका है निर्माण
समरहिल में पहले ही एक आर्बोरेटम (वनस्पति उद्यान) का निर्माण किया जा चुका है, जो पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। इसका रखरखाव हिमालयन वन अनुसंधान संस्थान कर रहा है। आर्बोरेटम 100 से ज्यादा में स्थानीय और दुर्लभ वनस्पतियों, वृक्षों को संरक्षित, प्रदर्शित किया गया है जो यहां के जैव विविधता को संरक्षित रखने में मदद कर रहा है।
2019 में जल गया था जंगल
गौरतलब है कि 2019 में पॉटर हिल और चेड़विक फॉल के पास चीड़ के जंगल में आग लग गई थी, जिससे आसपास के इलाकों में ईको रिजॉर्ट पूरी तरह जल गया था। आग लगने से धारकुफर, चैली, बटोल, सनोग और हिणुण गांवों को भी खतरा उत्पन्न हुआ था। अब क्षेत्र को वन्य जीव संरक्षण क्षेत्र का दर्जा देने के बाद वहां ईको टूरिज्म को फिर से विकसित किया जाएगा, जिससे न केवल पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि स्थानीय लोगों को भी लाभ होगा।